"जेन-जी और जेन-अल्फा पर अब लाठीचार्ज नहीं करेगी पुलिस", गृह विभाग बना रहा एसओपी
छात्रों और युवा पीढ़ी के प्रदर्शनों के दौरान अक्सर होने वाले बल प्रयोग व लाठीचार्ज की घटनाओं को रोकने के लिए राजस्थान गृह विभाग ने ऐतिहासिक पहल की है।
जयपुर। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और कोचिंग हब में भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक या छात्र राजनीति को लेकर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के बढ़ते विवादों के बीच राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने बड़ा नीतिगत बदलाव करने का फैसला किया है।
गृह विभाग अब 'जेनरेशन जी' (Gen-Z) और 'जेनरेशन अल्फा' (Gen-Alpha) यानी नई पीढ़ी के किशोरों व युवाओं के आंदोलनों से निपटने के लिए एक संवेदनशील और आधुनिक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिसिंग के पुराने तौर-तरीकों में बदलाव लाकर छात्रों और युवाओं पर सीधे बल प्रयोग की प्रथा को खत्म करना है।
क्यों पड़ी नई SOP की जरूरत?
हाल के वर्षों में जयपुर, कोटा, जोधपुर समेत कई शहरों में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर भी लाठीचार्ज और मुकदमे दर्ज किए जाने को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन की तीखी आलोचना हुई है:
मानसिकता और संवेदनशीलता में अंतर: आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z और Gen-Alpha) डिजिटल दौर में पली-बढ़ी है। उनके सोचने का तरीका, अधिकार चेतना और प्रतिक्रिया पारंपरिक प्रदर्शनकारियों से अलग होती है।
भविष्य पर मुकदमों का असर: मामूली धक्का-मुक्की या प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और एफआईआर दर्ज होने से प्रतिभाशाली युवाओं का भविष्य और करियर प्रभावित होता है।
पुलिस की छवि में सुधार: सरकार चाहती है कि पुलिस जनता और युवाओं के बीच दमनकारी शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक सहयोगी और समझदार व्यवस्था के रूप में दिखाई दे।
नई SOP के प्रमुख बिंदु
गृह विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित बदलाव शामिल किए जा रहे हैं:
संवाद पहली प्राथमिकता (De-escalation through Dialogue): किसी भी छात्र आंदोलन या युवा आक्रोश की स्थिति में सीधे लाठी या वाटर कैनन का उपयोग करने के बजाय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता पहले मौके पर पहुंचकर प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करेंगे।
लाठीचार्ज को अंतिम विकल्प भी नहीं बनाने पर जोर: गाइडलाइन में स्पष्ट किया जा रहा है कि जब तक असामाजिक तत्व हिंसा, आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान न पहुंचा रहे हों, तब तक सामान्य छात्रों पर लाठीचार्ज पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
बॉडी वॉर्न कैमरे और वीडियोग्राफी: प्रदर्शन स्थलों पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी वॉर्न कैमरे और ड्रोन निगरानी अनिवार्य की जाएगी, ताकि दोनों पक्षों के व्यवहार का वस्तुनिष्ठ रिकॉर्ड रहे और किसी भी पक्ष की ओर से ज्यादती न हो।
पुलिसकर्मियों को सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनिंग: फील्ड में तैनात रहने वाले जवानों और अधिकारियों को युवाओं के तनाव, उनके गुस्से के कारणों को समझने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के लिए विशेष संवेदीकरण (Sensitization) ट्रेनिंग दी जाएगी।
जल्द जारी होगी अधिसूचना
गृह विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और पुलिस के आला अधिकारियों से रायशुमारी के बाद इस एसओपी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद इसे पूरे प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नरेट और जिला पुलिस अधीक्षकों को लागू करने के लिए भेज दिया जाएगा।
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