रूस ने वैश्विक शक्ति के रूप में की भारत की सराहना
भारत में रूस के राजदूत रोमन बाबुश्किन ने नई दिल्ली में कहा कि भारत-रूस के बीच सहयोग मजबूत हो रहा है और दोनों देश आर्थिक और विदेश नीति में घनिष्ठ हित साझा करते हैं।
Delhi, August 21 —
रूस ने भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में स्वीकार करते हुए उसकी विविध विदेश नीति और बढ़ती आर्थिक ताकत की सराहना की है। भारत में रूस के राजदूत रोमन बाबुश्किन ने नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे और स्थिर परस्पर हित हैं और दोनों ने लगातार सहयोग बढ़ाने के रास्ते खोजे हैं।
उन्होंने बताया कि भारत और रूस के संबंध मजबूत हो रहे हैं और दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच यूक्रेन की स्थिति पर इस वर्ष दो बार फोन बातचीत हुई है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा इस वर्ष के अंत में आयोजित करने की तैयारी चल रही है। साथ ही, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की मॉस्को यात्रा में इस विषय पर और चर्चा होने की संभावना है।
बाबुश्किन ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जो भविष्य में और भी बढ़ेंगे।
भारत-रूस संबंध : वर्तमान स्थिति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्तमान संबंध (2025)
-
मजबूत रणनीतिक साझेदारी: भारत और रूस का रिश्ता आज भी दुनिया के सबसे स्थिर और गहरे द्विपक्षीय संबंधों में गिना जाता है। दोनों देशों की सहयोग व्यवस्था राजनीति, रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान, स्पेस, व्यापार, संस्कृति, और बहुपक्षीय मंचों (BRICS, SCO, G20) तक फैली है.
-
व्यापार और आर्थिक संबंध: 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार $60-68 बिलियन से अधिक पहुंच गया है, जिसमें मुख्य रूप से कच्चा तेल, कोयला, उर्वरक और रक्षा उपकरण भारत रूस से लाता है, जबकि दवाइयाँ, लोहा, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि भारत से रूस जाते हैं.
-
रक्षा सहयोग: ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 ट्रायंफ मिसाइल सिस्टम, पनडुब्बी, टैंक से लेकर जॉइंट R&D जैसी कई सामरिक परियोजनाएं दोनों देशों के बीच चल रही हैं.
-
ऊर्जा और विज्ञान: परमाणु ऊर्जा (कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट), स्पेस प्रौद्योगिकी, साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि में संयुक्त कार्य.
-
राजनीतिक और वैश्विक समर्थन: रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है और भारत रूस की एक्ट ईस्ट एवं इंडो-पैसिफिक नीति को सपोर्ट करता है.
-
नई चुनौतियाँ: रूस-चीन की निकटता, भारत-अमेरिका के बढ़ते संबंध, पश्चिमी देशों के रूस पर लगे प्रतिबंध, भुगतान व्यवस्था और रक्षा आपूर्ति में देरी जैसी चुनौतियां भी हैं.
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
-
1947 में राजनयिक संबंध: स्वतंत्रता के कुछ महीनों बाद ही दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए.
-
सोवियत काल: सोवियत संघ ने भारत को आर्थिक योजना, भारी उद्योग, स्टील, माइनिंग आदि में सहयोग दिया। शीतयुद्ध के दौरान यह सहयोग और मजबूत हुआ।
-
1971 की मित्रता की संधि: भारत-पाक युद्ध के समय सोवियत संघ ने खुलकर भारत का साथ दिया और “Indo-Soviet Treaty of Peace, Friendship and Cooperation” हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को ऐतिहासिक नई ऊंचाई दी.
-
संयुक्त राष्ट्र और कश्मीर: सोवियत संघ ने यूएनएससी में कश्मीर आदि मुद्दों पर भारत के पक्ष में वीटो का इस्तेमाल किया.
-
मीडिया, विज्ञान, अंतरिक्ष: USSR ने भारतीय उपग्रहों के प्रक्षेपण (आर्यभट्ट, भास्कर) में सहयोग किया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया.
-
1991 के बाद (सोवियत विघटन): सोवियत विघटन के बाद संबंधों में परिर्वतन आया, लेकिन 2000 में “Strategic Partnership” और 2010 में “Special & Privileged Strategic Partnership” के बाद रिश्ते फिर मजबूत हुए.
कुल मिलाकर
भारत-रूस संबंध समय की कसौटी पर खरा उतरा “स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” है। बदलती वैश्विक राजनीति में भी दोनों देश अपने ऐतिहासिक मित्रवत संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं.
मुख्य बिंदु संक्षेप में:
-
रणनीतिक, आर्थिक, रक्षा और वैश्विक सहयोग
-
ऐतिहासिक – 1947 से मित्रता, सोवियत संरक्षण, 1971 संधि
-
वर्तमान में—तेज़ व्यापार, रक्षा तकनीक, वैश्विक मंचों पर साथ
-
चुनौतियाँ – रूस-चीन नज़दीकी, पश्चिमी प्रतिबंध, नई जियोपॉलिटिक्स
-
भविष्य – संबंधों को बहुस्तरीय बनाए रखने की सतत कोशिश
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0