Rajasthan News: 'कांग्रेस से अलग हुए सभी दल वापस लौटें, राहुल गांधी को दिल से नेता मानें': अशोक गहलोत का बड़ा बयान

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने विपक्षी एकजुटता और पार्टी की मजबूती को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने अपील की है कि अतीत में जो भी राजनीतिक दल या नेता कांग्रेस से अलग हुए हैं, उन्हें अब पार्टी में वापस लौट आना चाहिए (घर वापसी)।

Jun 12, 2026 - 18:17
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Rajasthan News: 'कांग्रेस से अलग हुए सभी दल वापस लौटें, राहुल गांधी को दिल से नेता मानें': अशोक गहलोत का बड़ा बयान
Ashok Gehlot

जयपुर। राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस को और अधिक मजबूत करने और विपक्षी एकजुटता की कवायद के बीच, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने एक बड़ा बयान दिया है। अशोक गहलोत ने खुले तौर पर अपील की है कि अतीत में जिन भी नेताओं या दलों ने कांग्रेस पार्टी छोड़ी थी, उन्हें अब अपने मूल घर (कांग्रेस) में वापस लौट आना चाहिए।

इसके साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि सभी नेताओं को बिना किसी संकोच के राहुल गांधी को अपना सर्वमान्य नेता स्वीकार कर लेना चाहिए।

'कांग्रेस से अलग हुए दलों की हो घर वापसी'

अशोक गहलोत ने अपने बयान में कहा कि आज देश के जो राजनीतिक हालात हैं, उसमें कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई ऐसे मौके आए जब विभिन्न कारणों से कुछ नेताओं और धड़ों ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी क्षेत्रीय पार्टियां बना लीं। गहलोत ने अपील करते हुए कहा, "वक्त की मांग है कि कांग्रेस से अलग होकर बनी सभी पार्टियों की अब घर वापसी होनी चाहिए। देश को एक मजबूत विपक्ष और विकल्प देने के लिए सभी को एक मंच पर आना होगा।"

'राहुल गांधी को दिल से नेता स्वीकार करें'

पूर्व सीएम ने राहुल गांधी के संघर्ष और उनके राजनीतिक सफर की तारीफ करते हुए कहा कि राहुल ने सड़क से लेकर संसद तक जनता की आवाज उठाई है। गहलोत ने कहा, "विपक्ष और कांग्रेस से जुड़े सभी नेताओं को अब राहुल गांधी को दिल से अपना नेता मान लेना चाहिए। उन्होंने साबित कर दिया है कि वे निडर होकर देश के आम आदमी, युवाओं और किसानों के लिए लड़ सकते हैं।"

इस बयान के क्या हैं राजनीतिक मायने?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अशोक गहलोत का यह बयान बेहद अहम है।

विपक्षी लामबंदी: इसे राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) और कांग्रेस के पुराने सहयोगियों (जैसे टीएमसी, एनसीपी, वाईएसआरसीपी आदि, जिनकी जड़ें कभी कांग्रेस में रही हैं) को एक मनोवैज्ञानिक संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है।

नेतृत्व पर मुहर: गहलोत के इस बयान का सीधा मतलब यह भी है कि पार्टी के भीतर और बाहर राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर अब कोई 'अगर-मगर' नहीं होना चाहिए।

गहलोत के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस अपने पुराने धड़ों को वापस जोड़ने के लिए कोई बड़ा राजनीतिक अभियान या 'घर वापसी' मुहिम शुरू करने जा रही है।

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