Rajasthan News: उदयपुर सांसद का बड़ा दावा: फ्री-एजुकेशन के नाम पर धर्मांतरण और तस्करी का खेल, NIA-CBI जांच की मांग
उदयपुर से बीजेपी सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने बाल तस्करी और धर्मांतरण (Religious Conversion) के एक बड़े इकोसिस्टम का पर्दाफाश होने का सनसनीखेज दावा किया है।
उदयपुर। राजस्थान के आदिवासी बहुल इलाकों में धर्मांतरण (Religious Conversion) और बाल तस्करी (Child Trafficking) का एक बड़ा और गंभीर मुद्दा सामने आया है। उदयपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने इस पूरे 'कन्वर्जन इकोसिस्टम' (Conversion Ecosystem) पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। यह मामला तब तूल पकड़ गया जब हाल ही में गोवा में उदयपुर के 7 आदिवासी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) और रेलवे पुलिस की मदद से रेस्क्यू किया गया।
क्या है पूरा मामला? (गोवा रेस्क्यू ऑपरेशन)
जानकारी के अनुसार, उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के रहने वाले 7 बच्चों (2 लड़कियां और 5 लड़के, उम्र 7 से 12 साल) को हाल ही में गोवा से रेस्क्यू किया गया।
इन बच्चों को ट्रेन के जरिए तमिलनाडु ले जाया जा रहा था।गोवा बाल कल्याण समिति को जब इसकी भनक लगी, तो उन्होंने उदयपुर की CWC को सूचित किया।
सूचना के बाद उदयपुर से एक विशेष टीम गोवा पहुंची और सभी बच्चों को सुरक्षित वापस उदयपुर ले आई, जहां फिलहाल उनकी काउंसलिंग की जा रही है।
'फ्री एजुकेशन' की आड़ में धर्मांतरण का नेक्सस
सांसद मन्नालाल रावत ने इस घटना को एक गहरी साजिश का हिस्सा बताया है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इस मामले में कई गंभीर दावे किए हैं:
धर्मांतरण का एजेंडा: सांसद का आरोप है कि गरीब आदिवासी परिवारों को 'मुफ्त शिक्षा' (Free Education) का लालच देकर उनके बच्चों को दूर-दराज के राज्यों में ले जाया जा रहा है, जिसका असली मकसद उनका धर्मांतरण कराना है।
पहले भी भेजे गए बच्चे: रावत ने दावा किया है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उदयपुर के करीब 15 बच्चों को इसी तरह से दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) भेजा जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय लिंक की आशंका: सांसद ने इस इकोसिस्टम के तार केवल भारत (पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु) तक ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान और नेपाल से भी जुड़े होने की आशंका जताई है। इसके पीछे उन्होंने संदिग्ध डिजिटल लेनदेन (Digital Transactions) का भी शक जाहिर किया है।
NIA, CBI और IB से जांच की मांग
डॉ. मन्नालाल रावत ने स्पष्ट किया है कि यह सामान्य मानव तस्करी का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग वाला नेटवर्क काम कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे इकोसिस्टम की तह तक जाने के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से विस्तृत जांच करवाई जानी चाहिए।
सांसद के इन दावों और बच्चों के रेस्क्यू के बाद राजस्थान के प्रशासनिक और राजनीतिक महकमे में हड़कंप मच गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और जांच एजेंसियां इस गंभीर मामले में आगे क्या कार्रवाई करती हैं।
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