शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे-बहू का अटरू में वोटर बनने का आवेदन खारिज: जांच कमेटी के सामने पड़ोसियों के बयान से खुला सच, चुनावी अटकलों पर लगा ब्रेक

राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों के बीच बारां जिले की नवगठित अटरू नगर पालिका में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर और बहू हेमलता द्वारा वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के प्रयास को बड़ा झटका लगा है।

Aug 28, 2026 - 16:01
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शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे-बहू का अटरू में वोटर बनने का आवेदन खारिज: जांच कमेटी के सामने पड़ोसियों के बयान से खुला सच, चुनावी अटकलों पर लगा ब्रेक
Madan Dilawar

जयपुर। राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के बिगुल बजते ही हाड़ौती अंचल की राजनीति में बड़ा प्रशासनिक व सियासी घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर और बहू हेमलता दिलावर द्वारा बारां जिले की नवगठित अटरू नगर पालिका के वार्ड नंबर 21 में वोटर बनने के लिए किया गया आवेदन खारिज कर दिया गया है।  

अटरू नगर पालिका में चेयरमैन की सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित होने के चलते राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि पवन दिलावर को यहां से निकाय चुनाव लड़ाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, प्रशासनिक जांच और पड़ोसियों के बयानों ने इस पूरी कवायद पर पानी फेर दिया।

अंगूठे के निशान और पते पर उपजा संदेह

उपखंड अधिकारी (SDM) अंजना सहरावत के अनुसार, मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत वार्ड-21 से पवन और हेमलता के नाम जोड़ने के आवेदन आए थे:  

हस्ताक्षर की जगह अंगूठा: आवेदन पत्र में दोनों शिक्षित होने के बावजूद हस्ताक्षर की जगह अंगूठे का निशान लगा हुआ था, जिससे प्रशासनिक स्तर पर प्रामाणिकता को लेकर संदेह पैदा हुआ।  

कोटा का आधार कार्ड और अटरू का पता: दस्तावेजों में आधार कार्ड रंगबाड़ी (कोटा) का था, जबकि आवेदन में अटरू बस स्टैंड के पास मकान नंबर 10 (ताई का घर) का पता देकर 6 महीने से वहां रहने का दावा किया गया था।  

5 सदस्यीय कमेटी की जांच और पड़ोसियों के बयान

संदेह होने पर एसडीएम ने 5 सदस्यीय जांच दल का गठन कर मौके पर भेजा:  

पड़ोसियों की गवाही: जांच टीम ने आवेदन में दर्शाए गए मकान के आसपास के 5 पड़ोसियों के विधिवत बयान दर्ज किए। सभी पड़ोसियों ने एक स्वर में कहा कि पवन दिलावर और उनकी पत्नी यहां न तो वर्तमान में रहते हैं और न ही पिछले 6 महीने से रहे हैं।  

नियमों के तहत आवेदन निरस्त: राज्य निर्वाचन आयोग के नियमानुसार किसी क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए कम से कम 6 माह के सामान्य निवास का प्रमाण जरूरी है। निवास की पुष्टि न होने पर प्रशासन ने दोनों के आवेदन निरस्त (Reject) कर दिए।  

पवन दिलावर की सफाई: "चुनाव लड़ने की कोई मंशा नहीं"

आवेदन खारिज होने और राजनीतिक चर्चाएं गर्म होने पर पवन दिलावर ने कहा:  

ऑनलाइन प्रक्रिया: उन्होंने कहा कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया था और हस्ताक्षर किए थे। मौके पर ताईजी ने तस्दीक के लिए अंगूठा लगाया था।  

चुनाव लड़ने से इनकार: पवन ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कुछ कार्यकर्ता जरूर चाहते थे कि वे चुनाव लड़ें, लेकिन उनकी न तो पार्षद और न ही चेयरमैन बनने की कोई मंशा है। यदि आवेदन खारिज हुआ है, तो नियमानुसार अपील करेंगे।

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