राजस्थान निकाय चुनाव 2026: टिकट चाहिए तो स्कैन करें 'QR कोड', कांग्रेस ने लागू किया नया डिजिटल सिस्टम; जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में टिकट वितरण को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक नया डिजिटल फॉर्मूला लागू किया है।
जयपुर। राजस्थान में 309 नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) के आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। टिकट वितरण में पारदर्शिता लाने, गुटबाजी पर रोक लगाने और जमीनी कार्यकर्ताओं को सीधा मौका देने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक अनूठी पहल करते हुए 'QR कोड आधारित डिजिटल आवेदन प्रणाली' शुरू की है।
अब निकाय चुनाव में पार्षद या अध्यक्ष पद का टिकट मांगने वाले किसी भी नेता या कार्यकर्ता को वरिष्ठ नेताओं के बंगलों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि उन्हें पार्टी के आधिकारिक क्यूआर कोड को स्कैन कर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।
कैसे काम करेगा कांग्रेस का नया 'QR कोड' सिस्टम?
कांग्रेस द्वारा तय की गई नई चयन प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
QR कोड स्कैन और ऑनलाइन फॉर्म: दावेदारों को पार्टी द्वारा जारी विशेष क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा, जो उन्हें कांग्रेस के आधिकारिक चुनावी पोर्टल पर ले जाएगा। वहां अपनी राजनीतिक सक्रियता, सामाजिक पृष्ठभूमि और वार्ड की जानकारी भरनी होगी।
हार्ड कॉपी जमा करना अनिवार्य: ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद दावेदार को उसकी दो प्रिंट कॉपी (हार्ड कॉपी) अपने संबंधित जिला एवं क्षेत्रीय प्रभारी को सौंपनी होगी।
ग्राउंड वेरिफिकेशन: क्षेत्रीय प्रभारी आवेदक के जमीनी प्रभाव, सक्रियता और जनता के बीच उसकी छवि की प्राथमिक जांच करेंगे।
वार रूम और प्रदेश नेतृत्व की स्क्रीनिंग: क्षेत्रीय प्रभारियों की रिपोर्ट के बाद आवेदन प्रदेश कांग्रेस के केंद्रीय वॉर रूम और स्क्रीनिंग टीम के पास पहुंचेगा, जहां गहन मंथन के बाद जिताऊ (विनेबल) उम्मीदवार पर अंतिम मुहर लगेगी।
पार्टी वॉर रूम में हुई मैराथन बैठकें
इस नए सिस्टम और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए जयपुर स्थित कांग्रेस वॉर रूम में प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और एआईसीसी महासचिव सचिन पायलट सहित वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में दो दिवसीय मैराथन फीडबैक बैठकें आयोजित की गईं।
इन बैठकों में सभी 50 जिलों के जिलाध्यक्षों, विधायकों, पूर्व विधायकों, सांसदों और मोर्चा-प्रकोष्ठों के प्रमुखों से निकाय चुनावों की तैयारियों का फीडबैक लिया गया।
सिफारिश और गुटबाजी पर नकेल कसने की रणनीति
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से:
पारदर्शिता बढ़ेगी: हर दावेदार का पूरा डेटा सीधे प्रदेश नेतृत्व के पास डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा।
दलाली और सिफारिश खत्म होगी: किसी स्थानीय क्षत्रप या नेता की मनमानी के कारण योग्य कार्यकर्ता की अनदेखी नहीं हो सकेगी।
समय की बचत: चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी होते ही बेहद कम समय में वैज्ञानिक तरीके से टिकटों का अंतिम चयन किया जा सकेगा।
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