प्रहलाद जोशी बने देश के नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कहा- 'विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं जिम्मेदारी'
नीट (NEET) परीक्षा विवाद और भारी छात्र विरोध के चलते धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के ठीक एक दिन बाद, वरिष्ठ भाजपा नेता प्रहलाद जोशी (Pralhad Joshi) ने देश के नए शिक्षा मंत्री का पदभार संभाल लिया है।
नई दिल्ली। देश भर में चल रहे भारी छात्र आंदोलन और नीट (NEET-UG) पेपर लीक विवाद के कारण पैदा हुए सियासी संकट के बीच, केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की कमान अब एक अनुभवी नेता को सौंप दी है। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रहलाद जोशी (Pralhad Joshi) को देश का नया शिक्षा मंत्री (Union Education Minister) नियुक्त किया गया है।
रविवार, 26 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में उन्होंने विधिवत रूप से अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया।
"विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं यह जिम्मेदारी"
पदभार संभालने के तुरंत बाद मीडिया को संबोधित करते हुए प्रहलाद जोशी ने मौजूदा संवेदनशील हालात को लेकर संतुलित प्रतिक्रिया दी।
छात्रों को संदेश: उन्होंने कहा, "मैं इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। देश का भविष्य हमारे छात्रों से जुड़ा है, और उनकी चिंताएं हमारी चिंताएं हैं।"
पारदर्शिता का भरोसा: नए मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार शिक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता और शुचिता (Purity) बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
नए शिक्षा मंत्री के सामने मौजूद 3 सबसे बड़ी चुनौतियां
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे (25 जुलाई) के तुरंत बाद कुर्सी संभालने वाले प्रहलाद जोशी के लिए यह सफर कांटों भरा रहने वाला है। उनके सामने कई तात्कालिक चुनौतियां खड़ी हैं:
छात्रों का गुस्सा शांत करना: जंतर-मंतर सहित देश भर में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और अन्य छात्र संगठनों का भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। जोशी की पहली चुनौती प्रदर्शनकारी छात्रों से संवाद स्थापित कर उन्हें वापस कक्षाओं की ओर लौटाना है।
NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) में सुधार: नीट और नेट (NET) जैसी परीक्षाओं में हुई धांधली के बाद NTA की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। सिस्टम की कमियों को दूर कर एक फूल-प्रूफ तंत्र (Foolproof mechanism) विकसित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
संसद में विपक्ष का सामना: मानसून सत्र के दौरान विपक्ष शिक्षा मंत्रालय के मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रहा है। एक कुशल रणनीतिकार के रूप में जोशी को संसद में विपक्ष के सवालों का कड़ाई से और तथ्यात्मक जवाब देना होगा।
संकटमोचक की भूमिका में जोशी
प्रहलाद जोशी इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री और कोयला एवं खान मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। पार्टी और सरकार के भीतर उन्हें एक कुशल प्रशासक और संकटमोचक (Troubleshooter) के रूप में जाना जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जोशी को यह जिम्मेदारी उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और सबको साथ लेकर चलने की क्षमता (Consensus-building skills) को ध्यान में रखते हुए सौंपी है, ताकि शिक्षा मंत्रालय में मचे इस अभूतपूर्व बवाल को जल्द से जल्द शांत किया जा सके।
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