महिला आयोग अधिनियम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिमला में राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित

हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में शिमला के बचत भवन में 'राज्य विशिष्ट कानूनों की समीक्षा' पर एक दिवसीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया।

Jun 8, 2026 - 21:04
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महिला आयोग अधिनियम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिमला में राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित
Himachal Pradesh State Commission for Women

शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा संयुक्त रूप से बचत भवन, उपायुक्त कार्यालय परिसर, शिमला में "राज्य विशिष्ट कानूनों की समीक्षा" विषय पर एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1996 के लागू होने के पश्चात यह पहली बार है जब आयोग के अधिनियम की इतनी व्यापक समीक्षा की गई है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अधिनियम को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न हितधारकों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त करना था।

बदलते परिवेश में कानूनों की समीक्षा जरूरी: विद्या नेगी

कार्यशाला का आधिकारिक शुभारंभ हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा विद्या नेगी तथा आयोग की सचिव बुशरा अंसारी द्वारा किया गया। अपने संबोधन में अध्यक्षा विद्या नेगी ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने तथा शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर कानूनों की समीक्षा बेहद आवश्यक है।

उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 1996 में बनाए गए अधिनियम ने महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, किन्तु बदलते सामाजिक परिवेश और डिजिटल युग में महिलाओं के समक्ष उभर रही नई चुनौतियों को देखते हुए इस अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोग जल्द ही आवश्यक संशोधनों संबंधी अनुशंसाएं तैयार करेगा।

अधिनियम की धाराओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण

कार्यशाला के दौरान आयोग के विधि अधिकारी यशपाल ने हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1996 की विभिन्न धाराओं पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने आयोग की वर्तमान शक्तियों, कार्यप्रणाली, चुनौतियों तथा अन्य राज्यों में लागू सर्वश्रेष्ठ प्रावधानों का एक तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। इस दौरान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था, आयोग की जांच संबंधी शक्तियों और संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई।

परामर्श में उभरकर आए ये दो मुख्य सुझाव:

विभिन्न विभागों, पुलिस, सीआईडी, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने महिलाओं से जुड़े मामलों में जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया। विस्तृत मंथन के बाद ये प्रमुख सुझाव सामने आए:

 1. जिला स्तरीय समितियों का गठन: महिलाओं से संबंधित मामलों की प्रभावी निगरानी एवं त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जाए।

 2. नियमित मासिक बैठकें: राज्य महिला आयोग तथा पुलिस विभाग के मध्य हर महीने नियमित बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि लंबित मामलों की निगरानी और शिकायतों की समीक्षा प्रभावी ढंग से हो सके।

इन प्रमुख हस्तियों और संगठनों ने लिया भाग

इस गरिमामयी कार्यशाला में आयोग की सदस्य रीना द्रोच, रीना पंडीर एवं सरोज शर्मा सहित राधिका सूद, सोनिया शर्मा और विनय मौजूद रहे।

इसके अतिरिक्त प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र से पुलिस महानिरीक्षक (अपराध) सुश्री रानी बिंदु (IPS), महिला एवं बाल विकास विभाग से सीमा ठाकुर, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से डॉ. मृत्युंजय एवं डॉ. आयुष राज, एलजीबीटीक्यू+ (LGBTQ+) क्षेत्र से एमएक्स. डॉन हसर, पर्वतीय महिला विकास ट्रस्ट पालमपुर की विमला विश्वाप्रेमी, हिमधारा कलेक्टिव की सह-संस्थापक मानसी आशर, एकल महिला विकास समिति की निर्मला चंदेल और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS) के शोधार्थी शामिल हुए। विधि विशेषज्ञ के रूप में बहरा विश्वविद्यालय के विधि विभाग से डॉ. मनदीप वर्मा, डॉ. अदिति डिडवाल तथा डॉ. दीपशिखा शर्मा ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

भविष्य की रूपरेखा

कार्यशाला के समापन पर यह सर्वसम्मति व्यक्त की गई कि प्राप्त सभी बहुमूल्य सुझावों और अनुशंसाओं को संकलित कर एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इस संस्तुति रिपोर्ट को हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग अधिनियम को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं महिला हितैषी बनाने के लिए संबंधित उच्च प्राधिकारियों और सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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