गोहाना में अभ्युदय के ‘जमघट’ के तहत 23वीं व्याख्यानमाला व वार्षिक प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित
गोहाना में ‘जमघट’ कार्यक्रम श्रृंखला के तहत 23वीं व्याख्यानमाला और वार्षिक प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज, विकास और शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने संतुलित और नियोजित शहरीकरण की जरूरत पर जोर देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर भी चर्चा की।
गोहाना। अभ्युदय जनकल्याण न्यास के तत्वावधान में ‘जमघट’ कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत गोहाना में आयोजित 23वीं व्याख्यानमाला एवं वार्षिक प्रतिभा सम्मान समारोह में समाज, विकास और शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत अभ्युदय मंत्र के श्लोक पाठ से हुई। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द के साथ-साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी सामाजिक जीवन में बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक विकास से समाज मजबूत नहीं होता, बल्कि मानवीय मूल्यों की भी उतनी ही जरूरत होती है।
अतिथियों का स्वागत एवं परिचय डॉ. विवेक मलिक ने कराया। कार्यक्रम की रूपरेखा और ‘जमघट’ अभियान की पृष्ठभूमि पर डॉ. योगेन्द्र मलिक ने प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘जमघट’ का उद्देश्य समाज से जुड़े जटिल विषयों को आम लोगों की भाषा में समझाना और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना है। उन्होंने कहा कि यह व्याख्यानमाला इसी सोच का विस्तार है।
मुख्य वक्ता डॉ. मिलाप पुनिया ने अपने वक्तव्य में कहा कि उत्तर भारत के राज्यों के विकास को समझने के लिए शहरीकरण एक अहम पैमाना है। उन्होंने कहा कि यह विषय भले ही जटिल हो, लेकिन इसे सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाना आज की बड़ी जरूरत है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय अध्ययन के तहत अर्थशास्त्र, भूगोल और जनसंख्या विज्ञान जैसे विषयों के समन्वय से यह समझने की कोशिश की जाती है कि देश के किन क्षेत्रों में विकास की अधिक आवश्यकता है।
डॉ. पुनिया ने कहा कि भारत इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ एक ओर वैश्विक स्तर पर व्यापार और ऊर्जा को लेकर चुनौतियाँ बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग राज्यों की अपनी विकास संबंधी जरूरतें हैं।
उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में शहरीकरण की दर 40 से 50 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जबकि राजस्थान, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में यह दर अभी कम है।
उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का उदाहरण देते हुए कहा कि यह दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल है। एनसीआर में हजारों गांव और बड़ी आबादी निवास कर रही है, जिससे शहरीकरण की रफ्तार तेज हुई है और भूमि की कीमतों में भी तेज़ बढ़ोतरी हुई है।
कार्यक्रम के दौरान ‘जमघट’ संवाद सत्र में ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने भूमि, पलायन और आजीविका से जुड़े सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि आज कई ग्रामीण परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए जमीन बेचने को मजबूर हैं, जिससे आने वाले समय में कृषि और रोजगार पर संकट बढ़ने की आशंका है।
वक्ताओं ने कहा कि शहरीकरण को रोकना संभव नहीं है, लेकिन इसे संतुलित और नियोजित तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि गांव और शहर दोनों का विकास साथ-साथ हो सके।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और सामाजिक सरोकारों पर निरंतर संवाद जारी रखने का संकल्प लिया गया।
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