पंजाब यूनिवर्सिटी अध्यक्ष अनुराग दलाल NSUI में शामिल, कैंपस राजनीति में नई करवट
अनुराग दलाल की लोकप्रियता से NSUI को कैंपस में नई ताक़त मिलने की उम्मीद है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले छात्र संघ चुनावों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
चंडीगढ़, 27 अगस्त 2025 — पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा मौजूदा छात्र परिषद अध्यक्ष अनुराग दलाल को लेकर है। दलाल, जिन्होंने पिछले साल स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में इतिहास रचते हुए PUCSC (Panjab University Campus Students’ Council) का अध्यक्ष पद जीता था, अब औपचारिक तौर पर NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) में शामिल हो गए हैं।
यह चंडीगढ़ के कांग्रेस भवन, सेक्टर 35 में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहां कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा और NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी मुख्य रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एच.एस. लक्की और NSUI के राष्ट्रीय-स्थानीय पदाधिकारी भी शामिल रहे। हुड्डा और चौधरी की उपस्थिति ने इस जॉइनिंग को सिर्फ छात्र राजनीति नहीं, बल्कि कांग्रेस की व्यापक रणनीति से भी जोड़ दिया है।
कौन हैं अनुराग दलाल?
- वर्तमान पद और पहचान
अनुराग दलाल 2024–25 में पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र परिषद अध्यक्ष रहे। उन्होंने यह पद किसी राष्ट्रीय छात्र संगठन से नहीं बल्कि स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर जीतकर हासिल किया। 50 साल बाद पहली बार किसी स्वतंत्र उम्मीदवार ने यह उपलब्धि पाई। - शैक्षणिक पृष्ठभूमि और परिवार
वे पंजाब यूनिवर्सिटी के केमिस्ट्री विभाग में पीएचडी शोधार्थी हैं। मूलतः हरियाणा के रोहतक ज़िले के लखन माजरा गाँव से हैं। पिता सुरेश दलाल और माता राजेश दलाल दोनों शिक्षक हैं, जबकि भाई रवि दलाल पेशे से डॉक्टर हैं। - राजनीतिक सफर
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा। पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने के बाद वे NSUI से जुड़े, लेकिन कुछ मतभेदों के चलते 2024 में उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उन्हें NSUI के बागी नेता सिकंदर बूढ़ा और स्थानीय छात्र संगठन SOPU सहित कई गुटों का समर्थन मिला और वे अध्यक्ष बन गए। - प्राथमिकताएँ
अध्यक्ष बनने के बाद दलाल ने कैंपस में CCTV कैमरे लगवाने और शोधार्थियों की समस्याओं को हल करने को अपनी प्राथमिकता बताया।
नाम बदलने का विवाद
कुछ महीने पहले दलाल तब विवादों में आ गए जब उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर “पंजाब एंड हरियाणा यूनिवर्सिटी” करने का प्रस्ताव दिया। उनका तर्क था कि बड़ी संख्या में छात्र हरियाणा से आते हैं, इसलिए नाम में दोनों राज्यों का ज़िक्र होना चाहिए।
हालाँकि, इस कदम का छात्रों, पूर्व छात्रों और राजनीतिक हलकों ने कड़ा विरोध किया। दबाव बढ़ने पर उन्होंने यह प्रस्ताव वापस ले लिया और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।
NSUI में शामिल होने का महत्व
दलाल की NSUI में वापसी से संगठन को पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में नई ताक़त मिली है। पहले से ही मौजूद NSUI को उनकी लोकप्रियता से बड़ी बढ़त मिलने की संभावना है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पार्टी छात्र राजनीति को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति से जोड़कर देख रही है। वहीं, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने दलाल का स्वागत करते हुए इसे संगठन के लिए “बूस्टर” करार दिया।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम आने वाले छात्र संघ चुनावों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
बन रहा है नया संविधान
इधर यूनिवर्सिटी प्रशासन भी छात्र राजनीति को अधिक पारदर्शी और संगठित बनाने में जुटा है। पहली बार छात्र परिषद का लिखित संविधान तैयार किया जा रहा है। इससे भविष्य में छात्र नेताओं के अधिकार और ज़िम्मेदारियां स्पष्ट हो जाएंगी।
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पहलू |
विवरण |
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पद |
पूर्व PUCSC अध्यक्ष (2024–25) |
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शैक्षणिक रोल |
PhD शोधार्थी, केमिस्ट्री विभाग |
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परिवार |
शिक्षक माता-पिता, भाई डॉक्टर |
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राजनीतिक सफर |
दिल्ली में सक्रिय, PU में स्वतंत्र रूप से अध्यक्ष बने |
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प्राथमिकताएँ |
सुरक्षा (CCTV), शोधार्थियों की भलाई |
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विवाद |
विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव |
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NSUI जॉइनिंग |
कांग्रेस भवन, चंडीगढ़ में दीपेंद्र हुड्डा और वरुण चौधरी की मौजूदगी में |
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