“गाँव-गाँव जाकर हर सोलर साइट तक संघर्ष करूंगा”-दिनेश बिश्नोई ने जंतर मंतर से केंद्र-राज्य सरकार को दी चुनौती, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के साहस की सराहना
Dinesh Bishnoi News: जंतर-मंतर पर दिनेश बिश्नोई ने 30 लाख पेड़ों की कटाई पर केंद्र-राज्य सरकार को घेरा, ओरण-गोचर बचाने की मांग, भाटी के साहस की सराहना की ।
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2025: माँ अमृता देवी राजस्थान पर्यावरण संघर्ष समिति के तत्वावधान में जंतर मंतर पर हुए व्यापक प्रदर्शन में समिति के संयोजक दिनेश बिश्नोई ने राजस्थान में बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की उपस्थिति में दिनेश ने कहा कि वे राजस्थान के हर गाँव, हर खेत और हर उस स्थान तक जाएंगे जहाँ पेड़ काटकर सोलर प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं।
दिनेश बिश्नोई ने कहा,“जब राजस्थान के अधिकतर विधायक, मंत्री और सांसद इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए थे, तब से शिव के युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी लगातार पर्यावरण और ओरण बचाने के लिए संघर्षरत रहे हैं। उनका यह साहस काबिले-तारीफ है और मैं उनके इस संघर्ष को नमन करता हूँ।”
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी देते हुए दिनेश ने कहा,
“मैं हर उस सोलर साइट तक जाऊंगा जहाँ पेड़ काटे गए हैं, और यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह संघर्ष सरकार के खिलाफ और तेज़ होगा। आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक हमारी माँगें पूरी नहीं होतीं।”
नीतिगत दोगलेपन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा,
“एक तरफ केंद्र सरकार मरुस्थलीकरण रोकने के लिए योजनाएं बना रही है, दूसरी तरफ निजी कंपनियों से पेड़ कटवा रही है। क्या सरकार सोलर प्लेट लगाकर मिट्टी ढक देने को मरुस्थलीकरण रोकना मान रही है?”
ऐतिहासिक बलिदान को किया याद:
कार्यक्रम में दिनेश ने 1730 के खेजड़ली नरसंहार और माँ अमृता देवी बिश्नोई सहित 363 शहीदों के बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “सिर साटें रूंख रहे तो भी सस्तो जाण” का भाव आज भी प्रासंगिक है और वर्तमान में लगभग 30 लाख पेड़ों की कटाई उन शहीदों के बलिदान का अपमान है।
जन सहयोग और माहौल:
जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर और नागौर सहित राजस्थान से बड़ी संख्या में विद्यार्थी, किसान और महिलाएं प्रदर्शन में शामिल हुईं। नारे गूंजे — “ओरण बचाओ, खेजड़ी बचाओ” और “हरित ऊर्जा हाँ, वन-विनाश नहीं।”
प्रमुख मांगें:
1. Tree Protection Act तुरंत लागू किया जाए
2. मल्टीनेशनल सोलर कंपनियों द्वारा पेड़ कटाई पर सख्त रोक लगे
3. नई पर्यावरण सुरक्षा नीति बनाई जाए
4. काटे गए पेड़ों के स्थान पर नए पेड़ अनिवार्य रूप से लगाए जाएं
5. गोचर व ओरण भूमि की रक्षा हो और इन्हें कानूनी संरक्षण मिले
6. प्रभावित स्थानीय लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए
7. CSR फंड का उपयोग स्थानीय लोगों के हित में हो
आगे की कार्य योजना:
दिनेश बिश्नोई ने बताया कि यह प्रदर्शन दिल्ली से शुरू होकर जोधपुर और जयपुर तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को एक विस्तृत स्मरण-पत्र सौंपा जाएगा जिसमें सभी मांगों का विस्तार से उल्लेख होगा।
पर्यावरण संरक्षण की वैज्ञानिक आवश्यकता:
आयोजकों ने बताया कि खेजड़ी राजस्थान की थार पारिस्थितिकी की जीवनरेखा है जो मिट्टी, नमी, चारा और जैव-विविधता का मुख्य आधार है। ओरण (पवित्र सामुदायिक उपवन) राजस्थान की पुरानी परंपरा है जिसे कानूनी संरक्षण की जरूरत है।
कौन हैं दिनेश बिश्नोई:
दिनेश बिश्नोई एक प्रतिबद्ध युवा कार्यकर्ता हैं जो छात्र जीवन से ही सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने किरोड़ीमल कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र नेता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न छात्र संघों में अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से उन्होंने युवाओं के अधिकारों और शैक्षणिक सुधारों के लिए काम किया है।
राजस्थान से गहरा लगाव रखने वाले दिनेश बिश्नोई हमेशा से प्रदेश के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण, किसान हितों और सामाजिक न्याय के मामलों में उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें युवा पीढ़ी का एक प्रभावशाली आवाज़ बनाती है। उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में है जो राजनीतिक दबावों से मुक्त होकर जनहित के मुद्दों पर बेबाकी से बोलता है।
माँ अमृता देवी राजस्थान पर्यावरण संघर्ष समिति के संयोजक के रूप में दिनेश बिश्नोई का नेतृत्व इस बात का प्रमाण है कि वे सिर्फ मुद्दे उठाने में ही नहीं बल्कि उन्हें व्यवस्थित आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने में भी सक्षम हैं।
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