Rajasthan News: जयपुर हाईकोर्ट का भजनलाल सरकार को बड़ा झटका: OTS चौराहे प्रोजेक्ट पर गहलोत राज का पुराना कॉन्ट्रैक्ट बहाल, काम शुरू करने के आदेश
जयपुर हाईकोर्ट ने ओटीएस (OTS) चौराहे के विकास प्रोजेक्ट को लेकर भजनलाल सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के समय हुए कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने के जेडीए (JDA) के फैसले को निरस्त कर दिया है और पुरानी कंपनी (JSL Infra) के साथ ही काम तुरंत शुरू करने के आदेश दिए हैं।
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में ओटीएस (OTS) चौराहे के विकास परियोजना को लेकर जयपुर हाईकोर्ट ने भजनलाल शर्मा सरकार के फैसले को पलट दिया है। कोर्ट ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना में लंबे समय से हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे तुरंत शुरू करवाने के आदेश दिए हैं। साथ ही, उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जिनकी वजह से इस काम में बेवजह देरी हुई।
यह परियोजना पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के समय घोषित की गई थी। सत्ता परिवर्तन के बाद भजनलाल सरकार इसमें लंबे समय से ढील बरत रही थी। अब हाईकोर्ट ने गहलोत सरकार के समय तय की गई प्रक्रिया के अनुसार ही काम करवाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, कोर्ट ने भजनलाल सरकार द्वारा कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने और नई डीपीआर (DPR) बनाने के फैसले को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
'सरकार बदलने से वैध अनुबंध खत्म नहीं किए जा सकते'
जस्टिस संवेद जैन की एकलपीठ ने जेएसएल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड (JSL Infra Private Limited) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में सरकार बदलने से वैध कॉन्ट्रैक्ट स्वतः समाप्त नहीं हो जाते। राजनीतिक कारणों से ऐसे वैध कॉन्ट्रैक्ट से पीछे नहीं हटा जा सकता। कोर्ट ने परियोजना को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा कराने पर जोर दिया और टिप्पणी की कि सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों से बच नहीं सकती।
2022 में हुआ था 184 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट
गहलोत सरकार ने वर्ष 2021-22 के राज्य बजट में ओटीएस चौराहे को सिग्नल फ्री बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने डीपीbhajanआर तैयार कर टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी।
27 दिसंबर 2022 को जेएसएल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ था।
काम की शुरुआत 6 जून 2023 को हुई थी और मूल रूप से इसे 5 जून 2024 तक पूरा किया जाना था।
इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 184.30 करोड़ रुपये तय की गई थी।
कोर्ट ने जेडीए के तर्कों को माना गलत
सरकार बदलने के बाद जेडीए ने 24 अप्रैल 2024 को इस कॉन्ट्रैक्ट को निरस्त कर दिया था। इसके बाद 3 अप्रैल 2025 को फ्लाईओवर निर्माण के लिए नई डीपीआर बनाने हेतु नया टेंडर भी जारी कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान जेएसएल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट में दलील दी कि उनका कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह वैध था और जेडीए ने बिना किसी उचित कारण के उसे रद्द किया। कंपनी ने बताया कि उसने डिजाइन और ड्रॉइंग तैयार कर ली थी और आवश्यक संसाधन भी जुटा लिए थे, लेकिन जेडीए की तरफ से जमीन और जरूरी अनुमतियां उपलब्ध ही नहीं कराई गईं।
सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने जेडीए को निर्देश दिया है कि वह पुरानी प्रक्रिया और पुराने कॉन्ट्रैक्ट के तहत ही इस परियोजना को सुचारू रूप से पूर्ण कराए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से भजनलाल सरकार को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से बड़ा झटका लगा है।
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