थ्री-फेज प्लान, सफेद चादरें और ग्रीन कॉरिडोर: जानें दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से कैसे हटाए सोनम वांगचुक
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।
नई दिल्ली। 20 दिनों की लंबी भूख हड़ताल के बाद लगातार गिरते स्वास्थ्य के कारण, दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के जंतर-मंतर से जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटा दिया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशों और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह पर की गई है। हालांकि, वांगचुक को हटाने का यह तरीका किसी आम पुलिस कार्रवाई जैसा नहीं था; इसके लिए एक बेहद सीक्रेट और अचूक रणनीति बनाई गई थी।
नए पुलिस कमिश्नर का 'थ्री-फेज प्लान'
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के नए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली उच्चस्तरीय बैठक में ही इस ऑपरेशन का खाका तैयार कर लिया था। भीड़ को भड़कने से रोकने और मीडिया की नजरों से बचने के लिए, पुलिस ने इसे तीन चरणों में अंजाम दिया:
पहला चरण (मंच को कब्जे में लेना): शनिवार तड़के, जब प्रदर्शनकारियों की संख्या सबसे कम थी और मुख्य आयोजक अभिजीत डिपके (Abhijit Dipke) मंच पर मौजूद नहीं थे, तब स्पेशल स्टाफ के 30-35 अधिकारी बिना वर्दी (सादे कपड़ों) में अचानक मंच पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत वांगचुक के बिस्तर को चारों तरफ से बड़ी सफेद चादरों (White Sheets) से ढक दिया, ताकि किसी को भी अंदर की हलचल दिखाई न दे और अफरा-तफरी न मचे।
दूसरा चरण (भीड़ नियंत्रण): दूसरे लेयर में सीआरपीएफ (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने बैरिकेड्स के बाहर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को रोककर रखा, जिससे वे पुलिस कार्रवाई में कोई बाधा न डाल सकें।
तीसरा चरण (निगरानी): तीसरे चरण में, दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारी सीधे एंबुलेंस और कंट्रोल रूम के पास खड़े होकर पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे थे।
ग्रीन कॉरिडोर के जरिए पहुंचे सफदरजंग अस्पताल
सफेद चादरों की आड़ में पुलिस वांगचुक को सावधानी से उठाकर एंबुलेंस तक ले गई।
एंबुलेंस के निकलते ही ट्रैफिक पुलिस ने पहले से तैयार 'ग्रीन कॉरिडोर' का इस्तेमाल करते हुए सफदरजंग अस्पताल तक का पूरा रास्ता खाली करवा दिया।
इससे वांगचुक बिना किसी जाम या रुकावट के सीधे अस्पताल पहुंच गए, जहां दो डॉक्टरों और दो पैरामेडिक्स की स्पेशल टीम उनके इलाज के लिए पहले से तैनात थी।
समर्थकों का विरोध और पुलिस का पक्ष
वांगचुक के सहयोगी अभिजीत डिपके ने लौटने पर आरोप लगाया कि पुलिस वांगचुक को "चोरों की तरह" उठाकर ले गई और अब वे खुद आमरण अनशन पर बैठेंगे।
वहीं, नई दिल्ली के डीसीपी (DCP) सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि वांगचुक की जान बचाना प्राथमिकता थी। आरएमएल (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके चेकअप के बाद तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। पुलिस ने अपील की है कि बाकी प्रदर्शनकारी भी शांतिपूर्ण ढंग से जंतर-मंतर खाली कर दें।
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