Rahul Jhansla: 'छात्र स्वराज यात्रा' लेकर अलीगढ़ पहुंचे डूसू उपाध्यक्ष, छात्रसंघ चुनाव बहाली की भरी हुंकार
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) के उपाध्यक्ष राहुल झांसला यादव ने 'छात्र स्वराज यात्रा' के तहत अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) पहुंचकर छात्रसंघ चुनावों की बहाली की हुंकार भरी है। वर्ष 2019 से बंद पड़े चुनावों को लेकर उन्होंने प्रशासन पर छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप लगाया।
अलीगढ़/नई दिल्ली। देश के विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति और लोकतंत्र की बहाली के लिए अब एक नई मुहिम शुरू हो गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) के उपाध्यक्ष राहुल झांसला यादव ने 'छात्र स्वराज यात्रा' का आगाज कर दिया है। 2 फरवरी को उत्तर प्रदेश से शुरू हुई यह यात्रा दिल्ली से होते हुए सीधे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) पहुंची, जहां छात्रों ने इसका जोरदार स्वागत किया।
इस यात्रा का मुख्य मकसद छात्रसंघ चुनावों की बहाली है। राहुल झांसला यादव ने एएमयू (AMU) पहुंचकर छात्रों के साथ सीधा संवाद किया और उनकी परेशानियों को समझा। छात्रों का कहना है कि वे अपनी आवाज उठाने के लिए एक लोकतांत्रिक मंच चाहते हैं, जो पिछले कई सालों से उनसे छीन लिया गया है।
2019 से बंद हैं चुनाव, छात्रों में गुस्सा: राहुल झांसला ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का इतिहास गवाह है कि यहां हर वर्ग के छात्र एक साथ पढ़ते हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि 2019 के बाद से यहां छात्रसंघ चुनाव (Student Union Elections) नहीं कराए गए हैं। सरकार और प्रशासन ने मिलकर छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का काम किया है।
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प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप: डूसू उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब वे छात्रों से मिलने आ रहे थे, तो प्रशासन ने पुलिस के जरिए उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "यह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। चाहे सीएए (CAA) का मुद्दा हो या एनआरसी (NRC) का, एएमयू के छात्रों ने हमेशा देश के हर बड़े मुद्दे पर आगे बढ़कर अपनी बात रखी है। आज जब वे अपने हक की मांग कर रहे हैं, तो उनकी आवाज को कुचला जा रहा है।"
एकजुट होने की अपील: राहुल झांसला यादव ने सभी छात्रों से 'छात्र स्वराज यात्रा' से जुड़ने की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सभी छात्र एकजुट होकर संघर्ष नहीं करेंगे, तब तक छात्रसंघ की बहाली संभव नहीं है। यह यात्रा अब देश के उत्तरी हिस्से के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों को जागरूक करने का काम करेगी।
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