केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात (CUG) में 'वैश्विक भारतीय प्रवासी और सतत विकास' पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शानदार समापन
केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात (CUG), वडोदरा में 27 से 29 अप्रैल तक 'वैश्विक भारतीय प्रवासी, ट्रांसनेशनलिज़्म और सतत विकास' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रवासी अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 11 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों सहित 40 से अधिक प्रख्यात वक्ताओं ने हिस्सा लिया और 180 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
वडोदरा। केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात (CUG) के प्रवासी अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरविषयी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 27 से 29 अप्रैल तक कुंडेला स्थित नए परिसर में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय “वैश्विक भारतीय प्रवासी, ट्रांसनेशनलिज़्म और सतत विकास” रखा गया था। इस कार्यक्रम ने प्रवासन, प्रवासी अध्ययन और वैश्विक विकास पर गंभीर शैक्षणिक विमर्श के लिए एक साझा और वृहद मंच प्रदान किया।
देश-विदेश से उमड़े विद्वान, 180+ शोध-पत्र प्रस्तुत
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की व्यापक भागीदारी देखने को मिली।
- सम्मेलन के लिए कुल 450 से अधिक सार (Abstracts) प्राप्त हुए थे, जिनमें से लगभग 300 को स्वीकृति मिली।
- 180 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र (Research Papers) प्रस्तुत किए।
- 11 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों सहित 40 से अधिक प्रख्यात वक्ताओं ने इसमें हिस्सा लेकर इसके वैश्विक स्वरूप को और सुदृढ़ किया।
उद्घाटन सत्र: भारतीय प्रवासियों के रणनीतिक महत्व पर जोर
27 अप्रैल को विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कुलसचिव प्रो. एच. बी. पटेल ने अतिथियों का स्वागत किया, जिसके बाद सम्मेलन के संयोजक प्रो. नरेश कुमार ने सतत विकास के संदर्भ में प्रवासी अध्ययन को समझने के लिए अंतर्विषयी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अभिजीत चक्रवर्ती ने भारत की विदेश नीति में भारतीय प्रवासी समुदाय के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता सरिता बुढ़ू ने भारतीय प्रवासी समुदाय की सांस्कृतिक दृढ़ता और उनके वैश्विक योगदान पर विस्तार से चर्चा की। विशेष संबोधन चान ई. एस. चोएन्नी द्वारा ऑनलाइन दिया गया। साथ ही डॉ. पंकज वशिष्ठ और प्रो. राम शंकर दुबे ने भी क्षेत्रीय सहयोग और अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर अपने विचार रखे। सत्र का समापन प्रो. अतनु भट्टाचार्य के अध्यक्षीय संबोधन के साथ हुआ।
प्रवासन, नीतियां और श्रम पर गंभीर मंथन
तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में कई पूर्ण और तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें प्रवासन की बदलती प्रकृति, श्रम प्रवासन, नीति-निर्माण और सतत विकास जैसे समसामयिक मुद्दों पर मंथन हुआ। प्रो. एस. इरुदया राजन और प्रो. बिनोद खद्रिया सहित कई प्रतिष्ठित विद्वानों ने वैश्विक प्रवासन की चुनौतियों और संभावनाओं को उजागर किया।
समापन सत्र: भविष्य के शोध की दिशा तय
29 अप्रैल को महात्मा गांधी भवन में आयोजित समापन सत्र में प्रो. नरेश कुमार ने तीन दिवसीय सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस अवसर पर प्रो. अनीसुर रहमान, प्रो. तेज प्रताप सिंह, प्रो. (सेवानिवृत्त) असलम महमूद, प्रो. (सेवानिवृत्त) आर. के. काले और प्रो. घनश्याम ने ब्रेन ड्रेन, प्रवासी नीति, सांस्कृतिक संलयन और वैश्विक पहचान जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। अंत में डॉ. सूजाउद्दीन छप्परबन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए इस सम्मेलन को भविष्य के शोध और नीतिगत विमर्श की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत बताया।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन शैक्षणिक संवाद का एक सशक्त मंच साबित हुआ, जिसने वैश्विक विकास और कूटनीति में 'भारतीय प्रवासी समुदाय' को एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पुनः स्थापित किया है।
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