सुजलाम भारत शिखर सम्मेलन 2025: जल सुरक्षा के राष्ट्रीय एजेंडा की दिशा में बड़ा कदम
सुजलाम भारत विज़न 2025 सम्मेलन ने देश में जल सुरक्षा और जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत राष्ट्रीय एजेंडा तय किया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनभागीदारी और वैज्ञानिक तरीकों को केंद्र में रखते हुए नई रणनीतियाँ बनाई गईं। जल जीवन मिशन, नमामि गंगे और जल शक्ति अभियान जैसी योजनाएँ मिलकर देश के जल तंत्र को मजबूत कर रही हैं। सम्मेलन ने साफ किया कि स्वच्छ पानी गरिमा, स्वास्थ्य और विकास का आधार है।
नई दिल्ली। भारत मंडपम में 29 नवंबर 2025 को दो दिवसीय “सुजलाम भारत विज़न 2025” सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जल शक्ति मंत्रालय और नीति आयोग द्वारा आयोजित यह सम्मेलन देश में दीर्घकालिक जल सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल, जल संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने पर केंद्रित रहा। सुजलाम भारत केवल एक कार्यक्रम नहीं है - यह एक राष्ट्रीय प्रयास है जो देश के हर नागरिक को स्वच्छ पानी और बेहतर जीवन से जोड़ता है।
भारत आज तीव्र शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार, बदलते भू-उपयोग और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वैज्ञानिक तरीकों, पारंपरिक ज्ञान और सक्रिय जनभागीदारी का मेल ही समाधान माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि “स्वच्छ पानी केवल ज़रूरत नहीं यह गरिमा और अवसर का आधार है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता के तहत सुजलाम भारत विज़न छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है - नदियों और झरनों का पुनर्जीवन, ग्रे-वॉटर मैनेजमेंट, तकनीक आधारित समाधान, जल संरक्षण, टिकाऊ पेयजल आपूर्ति और समुदाय की भागीदारी। ये सभी क्षेत्र जल सुरक्षा का एक मजबूत ढांचा तैयार करते हैं।
सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता रही “पूरा-सरकार दृष्टिकोण”, जिसमें नीति-निर्माताओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाली टीमों को एक मंच पर लाया गया। इसका उद्देश्य था कि केवल नीतियाँ न बनें, बल्कि उनका प्रभावी कार्यान्वयन भी हो। इस मॉडल से देश जल-सुरक्षित और स्वावलंबी बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकेगा।
सम्मेलन में जल सुरक्षा के मानवीय पक्ष पर भी विशेष ज़ोर दिया गया। जब समुदायों को विश्वसनीय पेयजल मिलता है, तो स्वच्छता सुधरती है, बीमारियाँ कम होती हैं, किसान बेहतर फसलें उगा पाते हैं और महिलाओं को गरिमा व सुरक्षा मिलती है। जैसा एक प्रतिभागी ने कहा - “पानी तक पहुँच मतलब अवसर तक पहुँच।”
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जनभागीदारी पर दिया गया जोर भी कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। पिछले वर्ष उन्होंने सूरत में “जल संचय जनभागीदारी पहल” शुरू की थी और देशवासियों को जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया था। संदेश स्पष्ट था - केवल सरकारी नीति से काम नहीं चलेगा, जनता की भागीदारी ज़रूरी है।
जल शक्ति अभियान, “कैच द रेन” अभियान, और राष्ट्रीय स्तर की योजनाएँ जैसे नमामि गंगे, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन देश के जल परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला रही हैं। जल जीवन मिशन के तहत अब तक 15 करोड़ ग्रामीण घरों को नल का जल उपलब्ध कराया जा चुका है। 15 अगस्त 2019 को शुरू हुआ यह मिशन वर्ष 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को 55 लीटर प्रतिदिन स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने देश को “चार R” - Reduce, Reuse, Recharge, और Recycle - अपनाने के लिए भी प्रेरित किया है ताकि जल संसाधनों पर भविष्य का दबाव कम किया जा सके।
अंत में, सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि भारत की जल सुरक्षा मजबूत शासन, वैज्ञानिक सोच और जनता की भागीदारी से ही संभव है। सुजलाम भारत विज़न 2025 देश को जल-सुरक्षित, स्वावलंबी और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाने का राष्ट्रीय संकल्प है।
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