Rajasthan News: साइबर ठगों की अब खैर नहीं, हाईटेक अपराधियों पर नकेल कसने के लिए भर्ती किए जाएंगे प्राइवेट साइबर एक्सपर्ट

बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और हाईटेक साइबर अपराधों (Cyber Crimes) से निपटने के लिए राजस्थान पुलिस ने एक गेम-चेंजर फैसला लिया है।

Jul 20, 2026 - 19:17
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Rajasthan News: साइबर ठगों की अब खैर नहीं, हाईटेक अपराधियों पर नकेल कसने के लिए भर्ती किए जाएंगे प्राइवेट साइबर एक्सपर्ट
Rajasthan Police Cyber Crime

जयपुर। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल हो रही है, वैसे-वैसे अपराधियों ने भी अपना तरीका बदल लिया है। आज के समय में ट्रेडिशनल क्राइम से कहीं ज्यादा बड़ी चुनौती साइबर क्राइम बन चुका है। इसी चुनौती का सामना करने और शातिर डिजिटल ठगों पर नकेल कसने के लिए राजस्थान पुलिस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।

अब पुलिस केवल अपने पारंपरिक संसाधनों पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि साइबर स्पेस में बैठे अपराधियों को उन्हीं की भाषा में मात देने के लिए निजी साइबर एक्सपर्ट्स (Private Cyber Experts) को अपने साथ जोड़ने जा रही है।

क्यों पड़ी प्राइवेट एक्सपर्ट्स की जरूरत?

हाल के दिनों में राजस्थान (विशेषकर मेवात क्षेत्र, भरतपुर और अलवर) जामताड़ा की तर्ज पर नए साइबर क्राइम हब के रूप में उभरा है।

अपराधियों का हाईटेक होना: आजकल के हैकर्स और ठग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक, डार्क वेब और जटिल क्रिप्टो-करेंसी रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

तकनीकी गैप को भरना: पुलिस विभाग के पास बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन तकनीक में इतनी तेजी से आ रहे बदलावों को तुरंत पकड़ने के लिए एडवांस और डेडिकेटेड कोडिंग, एथिकल हैकिंग और फॉरेंसिक टूल्स के महारथियों की कमी खलती रही है। इसी गैप को भरने के लिए प्राइवेट सेक्टर के जीनियस दिमागों की मदद ली जाएगी।

कैसे काम करेंगे ये प्राइवेट एक्सपर्ट्स?

एक रिपोर्ट के अनुसार, इन विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक होगी:

जटिल मामलों की जांच (Critical Case Investigation): जब भी कोई बड़ा फाइनेंशियल फ्रॉड, डेटा ब्रीच या हाई-प्रोफाइल हैकिंग का मामला आएगा, तो ये एक्सपर्ट्स डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करने और आईपी एड्रेस (IP Address) को डिकोड करने में पुलिस की कोर टीम की मदद करेंगे।

डार्क वेब और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग: इंटरनेट के उस हिस्से (Dark Web) पर पैनी नजर रखना जहां हथियारों, ड्रग्स और पर्सनल डेटा की अवैध खरीद-बिक्री होती है।

पुलिस कर्मियों की ट्रेनिंग: ये प्राइवेट टेक प्रोफेशनल्स जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों को लेटेस्ट साइबर टूल्स और इन्वेस्टिगेशन तकनीकों की ट्रेनिंग भी देंगे।

भ्रष्टाचार और ढिलाई पर पहले से ही सख्त है सरकार

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार इस समय सुशासन और सुदृढ़ कानून व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत लापरवाह और दागी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है। इसी कड़ी में अब पुलिसिंग को हाईटेक बनाने के लिए यह अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।

इस फैसले से उम्मीद जगी है कि अब आम जनता से होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी बैंक कॉल और सोशल मीडिया फ्रॉड के मामलों का निपटारा न केवल तेजी से होगा, बल्कि अपराधियों को पकड़ना भी काफी आसान हो जाएगा।

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