Rajasthan News: नरेश मीणा फिर जाएंगे जेल! टोंक SC/ST कोर्ट ने रद्द की जमानत, जानिए क्या है हाईकोर्ट की शर्तों के उल्लंघन का मामला
टोंक जिले के देवली-उनियारा उपचुनाव में एसडीएम को थप्पड़ मारने और समरावता हिंसा मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा को एक बार फिर बड़ा कानूनी झटका लगा है।
जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने और उसके बाद भड़की समरावता हिंसा (Samrawata Violence) के मुख्य आरोपी नरेश मीणा (Naresh Meena) की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सोमवार को टोंक की एससी-एसटी (SC/ST) कोर्ट ने नरेश मीणा को हाईकोर्ट से मिली जमानत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
अदालत ने जमानत निरस्त करने के साथ ही उन्हें गिरफ्तार कर पेश करने के लिए गिरफ्तारी वारंट (Arrest Warrant) भी जारी कर दिया है।
क्यों रद्द हुई नरेश मीणा की जमानत?
समरावता हिंसा (FIR संख्या 166/2024, नगरफोर्ट थाना) के मामले में नरेश मीणा को पिछले साल 11 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी। लेकिन टोंक पुलिस ने हाल ही में एससी-एसटी कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक (Special PP) के जरिए एक प्रार्थना पत्र पेश किया था।
शर्तों का उल्लंघन: सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी कि नरेश मीणा ने जेल से बाहर आने के बाद हाईकोर्ट द्वारा तय की गई जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया है।
झालावाड़ का दौरा बना कारण: पुलिस ने बताया कि नरेश मीणा हाल ही में झालावाड़ स्कूल हादसे में मारे गए सात बच्चों के परिजनों से मिलने गए थे। इस दौरान हुई उनकी गिरफ्तारी और भीड़ जुटाने को पुलिस ने जमानत की शर्तों का सीधा उल्लंघन माना और कोर्ट से जमानत खारिज करने की अपील की। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जमानत रद्द कर दी।
नरेश मीणा ने बीजेपी और सिस्टम पर साधा निशाना
अपनी जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला:
लोकतंत्र और संविधान का हवाला: नरेश मीणा ने कहा, "मैंने केवल झालावाड़ हादसे के पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी आवाज उठाने की कोशिश की थी। अगर इस देश में पीड़ित परिवार से मिलने जाना जमानत का उल्लंघन है, तो फिर संविधान की परिभाषा ही बदल जाएगी।"
बीजेपी पर अहंकारी होने का आरोप: उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सिस्टम पर सत्ता का भारी दबाव है। भाजपा नेताओं को यह सहन नहीं हो रहा कि मैं गरीबों, किसानों और मजदूरों के हकों के लिए लड़ रहा हूँ।
न्यायालय का सम्मान: उन्होंने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि वे न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और फैसले की कॉपी मिलने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और बचाव का रास्ता अपनाएंगे।
अब आगे क्या होगा?
टोंक कोर्ट से अरेस्ट वारंट जारी होने के बाद अब पुलिस किसी भी वक्त नरेश मीणा को गिरफ्तार कर सकती है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, नरेश मीणा की लीगल टीम अब इस फैसले को चुनौती देने या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की रणनीति बना रही है। लेकिन फिलहाल, नरेश मीणा का वापस सलाखों के पीछे जाना लगभग तय हो गया है।
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