Rajasthan News: "मैं भी सिफारिश करूं तो टिकट मत देना": राजस्थान निकाय चुनाव से पहले अशोक गहलोत की दो टूक
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर कांग्रेस वॉर रूम में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिकट वितरण को लेकर बड़ा बयान दिया है।
जयपुर। राजस्थान में 309 नगरीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने टिकट वितरण प्रणाली को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। जयपुर स्थित कांग्रेस वॉर रूम में वरिष्ठ नेताओं और प्रभारियों की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने सिफारिशी संस्कृति पर जोरदार प्रहार किया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर टिकट सिफारिश के दम पर बांटे गए, तो पार्टी को हार का सामना करना पड़ेगा। इसलिए केवल निष्ठावान, जमीनी और जिताऊ कार्यकर्ताओं को ही चुनावी मैदान में उतारा जाना चाहिए।
"पूर्व सीएम की सिफारिश पर भी टिकट मत देना" - गहलोत
अशोक गहलोत ने अपने बयान में कहा:
पैरवी की राजनीति पर रोक: गहलोत ने कहा, "मेरे पास भी जयपुर, भरतपुर, बीकानेर सहित पूरे प्रदेश से लोग सिफारिश लेकर आते हैं। लेकिन मैं संगठन से साफ कहना चाहता हूं कि अगर मैं खुद भी किसी नाम की सिफारिश करूं, तो उसे टिकट मत देना।"
जमीनी हकीकत को प्राथमिकता: उन्होंने तर्क दिया कि किसी बड़े नेता या पूर्व सीएम की सिफारिश पर टिकट देने से जमीनी हकीकत छिप जाती है। स्थानीय वार्ड या पंचायत के समीकरण क्या हैं, यह केवल ग्राउंड पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और प्रभारियों को ही पता होता है। बिना जमीनी पकड़ के कोई भी चुनाव नहीं जीत सकता।
ऑब्जर्वर्स को मिले पूरी छूट: गहलोत ने मांग की कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी फील्ड में जिन प्रभारियों और पर्यवेक्षकों (Observers) को भेजे, उन्हें स्वतंत्र रूप से निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करने का पूरा अधिकार दिया जाए।
'Gen Z' को 50% से ज्यादा टिकट देने की पैरवी
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव (Generational Shift) की जरूरत पर बल देते हुए युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की वकालत की:
माहौल बदल रही युवा पीढ़ी: गहलोत ने कहा कि पूरे देश में Gen-Z (नई युवा पीढ़ी) के आने से राजनीतिक चेतना और माहौल बदला है। युवाओं ने समय-समय पर बड़े आंदोलनों में अपनी ताकत दिखाई है।
अनुभव और युवा ऊर्जा का तालमेल: उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी को 50 प्रतिशत से अधिक टिकट युवा पीढ़ी (Gen Z) को देने चाहिए, साथ ही वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का भी पूरा उपयोग करना चाहिए।
डोटासरा बोले- "हम युवाओं को देंगे 60% टिकट"
अशोक गहलोत के इस बयान के बाद पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी युवाओं की हिस्सेदारी पर बड़ा ऐलान किया। डोटासरा ने कहा कि पार्टी निकाय और पंचायत चुनावों में 60 फीसदी टिकट युवाओं को देने की गाइडलाइन निचले स्तर तक लागू करेगी।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि चुनाव जीतने के बाद बिकने वाले या पाला बदलने वाले नेताओं पर खास नजर रखी जाएगी। जिन्होंने कांग्रेस के सिंबल पर जीतकर पार्टी से गद्दारी की, उनके लिए टिकट के सारे दरवाजे बंद रहेंगे।
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