Rajasthan News:"ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे...": गहलोत vs डोटासरा की सियासी जंग के बीच कांग्रेस नेता के पोस्ट से राजस्थान की राजनीति में भूचाल
राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर सतह पर आ गई है।
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में 'सब कुछ ठीक है' का दावा करने वाले पार्टी आलाकमान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। सचिन पायलट के बाद अब पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खेमों के बीच शीत युद्ध (Cold War) की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी बीच, एक स्थानीय कांग्रेस नेता के विवादित सोशल मीडिया पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया है।
क्या है वह पोस्ट जिसने मचाई हलचल?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस के एक नेता (जिन्हें गहलोत कैंप का करीबी माना जाता है) ने इशारों-इशारों में एक तीखा तंज कसा।
विवादित लाइनें: पोस्ट में लिखा गया, "ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे जब अचानक कुछ बन जाते हैं तो उन्हें अपनी औकात भूलने की बीमारी हो जाती है... लेकिन जनता और कार्यकर्ता सब याद रखते हैं।"
हालांकि इस पोस्ट में सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और पार्टी कार्यकर्ता इसे सीधे तौर पर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के बढ़ते राजनीतिक कद और उनके कार्य करने के तरीके पर किया गया कटाक्ष मान रहे हैं।
गहलोत vs डोटासरा: क्यों छिड़ी है वर्चस्व की जंग?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विधानसभा चुनावों के बाद से ही राजस्थान कांग्रेस में समीकरण तेजी से बदले हैं।
डोटासरा का बढ़ता कद: विपक्ष में आने के बाद से गोविंद सिंह डोटासरा ने सड़क से लेकर विधानसभा तक काफी आक्रामक रुख अपनाया है। उनके इस तेवर से पार्टी में उनका कद बढ़ा है और वह खुद को एक मजबूत क्षत्रप के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
गहलोत कैंप की असहजता: अशोक गहलोत दशकों से राजस्थान कांग्रेस के सर्वमान्य नेता रहे हैं। डोटासरा के बढ़ते प्रभाव और पार्टी संगठन पर उनकी मजबूत होती पकड़ से पुराने और वफादार गहलोत समर्थकों में असहजता देखी जा रही है। यह पोस्ट उसी खीझ का नतीजा माना जा रहा है।
बीजेपी को मिला चुटकी लेने का मौका
कांग्रेस के भीतर चल रही इस बयानबाजी और पोस्ट वॉर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।
बीजेपी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस कभी भी जनता के मुद्दों पर एकजुट नहीं हो सकती, इनकी पूरी राजनीति सिर्फ अपनी-अपनी कुर्सी बचाने और एक-दूसरे को नीचा दिखाने तक सीमित है।
इस विवादित पोस्ट के बाद कांग्रेस आलाकमान (Congress High Command) और प्रदेश प्रभारी भी अलर्ट मोड पर आ गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं ताकि इस बयानबाजी को बढ़ने से रोका जा सके और पार्टी की छवि को और नुकसान न पहुंचे।
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