कोटा, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर.... राजस्थान के 11 और जिलों के किसानों के लिए खुशखबरी; खाद के लिए नई व्यवस्था लागू
राजस्थान के किसानों को पारदर्शी तरीके से और तय दर पर सब्सिडी वाला उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने डीबीटी पीओएस (DBT POS) एप्लिकेशन के नए वर्जन 3.77 का दायरा बढ़ा दिया है।
जयपुर। राजस्थान में रबी और आगामी फसलों के दौरान खाद की किल्लत और कालाबाजारी से जूझने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार कृषि विभाग ने राज्य में उर्वरक वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
राज्य के 11 और नए जिलों में डीबीटी पीओएस (DBT POS) एप्लिकेशन का नया वर्जन 3.77 लागू कर दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत अब उर्वरक की खरीद केवल अधिकृत फार्मर आईडी (Farmer ID) के माध्यम से ही संभव होगी।
किन 11 जिलों में शुरू हुई नई व्यवस्था?
कृषि विभाग के अनुसार, पहले दो चरणों में 7 जिलों में सफल क्रियान्वयन के बाद अब निम्नलिखित 11 जिलों में यह डिजिटल सिस्टम सक्रिय हो गया है:
हाड़ौती व पूर्वी राजस्थान: कोटा, झालावाड़, बारां, करौली, सवाई माधोपुर और दौसा।
मध्य व दक्षिणी राजस्थान: टोंक, डूंगरपुर और प्रतापगढ़।
उत्तरी व पश्चिमी राजस्थान: हनुमानगढ़ और जालोर।
इन जिलों को मिलाकर अब प्रदेश के 18 जिलों में डिजिटल पीओएस सिस्टम के जरिए उर्वरक बिक्री का काम शुरू हो चुका है।
कालाबाजारी और गैर-कानूनी डायवर्जन पर लगेगी लगाम
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि किसान-ग्रेड यूरिया की एक बोरी सरकार किसानों को मात्र ₹267 में उपलब्ध कराती है, जबकि प्रति बैग करीब ₹1,600 की भारी सब्सिडी सरकार खुद वहन करती है। वहीं औद्योगिक ग्रेड यूरिया की कीमत ₹2,500 से अधिक होती है। इस भारी अंतर के चलते सब्सिडी वाले यूरिया को फैक्ट्रियों में डायवर्ट करने और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं।
डिजिटल बुकिंग और पीओएस सिस्टम 3.77 से:
एक लाख से अधिक किसानों ने की बुकिंग: पहले दो चरणों में ही 1 लाख से अधिक किसानों ने 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया इस व्यवस्था से बुक किया है।
जबरन टैगिंग पर रोक: डीलर अब यूरिया के कट्टे के साथ किसानों को सल्फर, जिंक या कीटनाशक जैसे अन्य महंगे उत्पाद जबरन नहीं थोप सकेंगे।
पारदर्शी स्टॉक ट्रैकिंग: दुकानदारों और कृषि अधिकारियों के पास रियल-टाइम स्टॉक की जानकारी रहेगी, जिससे नकली किल्लत नहीं बनाई जा सकेगी।
राजस्थान में 88.85 लाख फार्मर आईडी तैयार
राज्य सरकार ने प्रदेश के 88.85 लाख किसानों की डिजिटल फार्मर आईडी तैयार कर ली है, जिससे राजस्थान इस मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। कृषि विभाग में जल्द ही 'एग्रीस्टैक कमिश्नरेट' (AgriStack Directorate) की स्थापना भी की जा रही है, जिससे खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य सरकारी अनुदान सीधे किसानों के खातों और आईडी से लिंक किए जा सकेंगे।
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