Rajasthan News: मॉनसून सत्र में UCC बिल लाने की तैयारी में सरकार; लिव-इन रिलेशनशिप, तलाक, संपत्ति... जानिए क्या-क्या बदलेगा
उत्तराखंड की तर्ज पर अब राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार भी राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
जयपुर। राजस्थान की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। उत्तराखंड के बाद राजस्थान देश का ऐसा दूसरा राज्य बनने की राह पर है, जहां धार्मिक पर्सनल कानूनों को हटाकर सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू किया जाएगा।
विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और प्रशासनिक हलकों से मिले संकेतों के अनुसार, सरकार आगामी विधानसभा के मॉनसून सत्र में यूसीसी विधेयक (UCC Bill) पेश कर सकती है।
UCC लागू होने से राजस्थान में क्या-क्या बदलेगा?
राजस्थान यूसीसी बिल के लागू होते ही आम जनता के सामाजिक और पारिवारिक जीवन से जुड़े कई अहम नियमों में सीधा बदलाव आएगा:
1. लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी: प्रदेश में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
माता-पिता को सूचना: 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के लिव-इन में रहने पर उनके अभिभावकों/माता-पिता को सूचना दी जाएगी।
बच्चों को कानूनी अधिकार: लिव-इन संबंध से पैदा हुए बच्चों को उस दंपत्ति की वैध संतान माना जाएगा और उन्हें संपत्ति में पूरा अधिकार मिलेगा।
2. बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban on Polygamy)
एक ही शादी की इजाजत: यूसीसी लागू होने के बाद धर्म या पंथ से परे हटकर किसी भी व्यक्ति को पहली पत्नी/पति के जीवित रहते दूसरी शादी करने की इजाजत नहीं होगी। बहुविवाह को पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित किया जाएगा।
3. शादी और तलाक के एक समान नियम
शादी का पंजीकरण अनिवार्य: धर्म कोई भी हो, सभी के लिए विवाह का कानूनी पंजीकरण (Marriage Registration) कराना mandatory होगा।
एकतरफा तलाक पर रोक: बिना अदालती प्रक्रिया के दिए जाने वाले किसी भी तरह के एकतरफा या असामाजिक तलाक (जैसे तीन तलाक आदि) पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए तलाक के आधार और अधिकार एक समान होंगे।
4. बेटियों को संपत्ति में बराबर का हक
समान वसीयत व उत्तराधिकार: पैतृक संपत्ति में बेटों और बेटियों को एक समान अधिकार प्राप्त होंगे। लैंगिक विषमता को खत्म करते हुए महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए यह प्रावधान बेहद अहम माना जा रहा है।
5. गोद लेने (Adoption) के नियम
सबके लिए एक जैसा कानून: बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष और पारदर्शी होगी। अब तक अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ के तहत गोद लेने के जो अलग नियम थे, उन्हें समाप्त कर एक सर्वमान्य व्यवस्था बनाई जाएगी।
उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन और समिति का गठन
राजस्थान सरकार ने यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कानून विशेषज्ञों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति ने उत्तराखंड यूसीसी मॉडल (Justice Ranjan Desai Committee report) की बारीकियों का अध्ययन किया है ताकि राजस्थान के स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश के अनुकूल एक मजबूत विधेयक तैयार किया जा सके।
हालांकि, आदिवासी समुदायों (Tribal Communities) की परंपराओं और रूढ़िवादी अधिकारों को लेकर कानून में क्या छूट दी जाएगी, इस पर भी सरकार विशेष ध्यान रख रही है।
विधानसभा के आगामी सत्र में बिल पेश होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमाने के पूरे आसार हैं, जहां सत्तारूढ़ भाजपा इसे 'महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता' का बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसके विभिन्न प्रावधानों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
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