छात्र नेता शुभम रेवाड़ के घर देर रात पहुंची पुलिस: नजरबंद करने का आरोप, वीडियो जारी कर प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता शुभम रेवाड़ के डीडवाना स्थित आवास पर देर रात पुलिस बल पहुंचा। शुभम रेवाड़ ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस और प्रशासन उन्हें छात्र राजनीति और आंदोलन से दूर रखने के लिए घर पर नजरबंद (House Arrest) करने की कोशिश कर रहा है।
जयपुर। राजस्थान में छात्र राजनीति से जुड़े प्रमुख चेहरे और छात्र नेता शुभम रेवाड़ (Shubham Rewad) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शुभम रेवाड़ के डीडवाना स्थित पैतृक घर के बाहर देर रात भारी पुलिस जाब्ता तैनात किए जाने की खबर सामने आई है। छात्र नेता ने खुद एक वीडियो संदेश जारी कर पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर उन्हें घर में ही नजरबंद (House Arrest) करने का गंभीर आरोप लगाया है।
वीडियो जारी कर पुलिस-प्रशासन पर लगाए आरोप
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शुभम रेवाड़ ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़े सवाल खड़े किए हैं:
"आवाज दबाने की कोशिश": शुभम रेवाड़ ने कहा कि वे छात्रों के अधिकारों, छात्र संघ चुनाव बहाली और जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर उनकी आवाज दबाना चाहती है।
देर रात घेराबंदी: उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व नोटिस या वारंट के देर रात पुलिस की गाड़ियां उनके घर के बाहर लगा दी गईं और उन्हें कहीं भी बाहर जाने से रोकने का प्रयास किया गया।
शुभम रेवाड़ ने कहा: "छात्र हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करने वालों को जेल और नजरबंदी का डर दिखाया जा रहा है। चाहे जितना दबाव बना लिया जाए, छात्रों की आवाज दबने वाली नहीं है।"
छात्र संघ चुनाव और आंदोलनों को लेकर चर्चा में रहे हैं रेवाड़
शुभम रेवाड़ प्रदेश में छात्र संघ चुनाव बहाली, राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना और छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। हाल ही में हुए आंदोलनों और प्रदर्शनों में उनकी सक्रिय भागीदारी को देखते हुए प्रशासन किसी भी संभावित विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए एहतियातन सतर्कता बरत रहा है।
समर्थकों में आक्रोश, सोशल मीडिया पर विरोध तेज
देर रात पुलिस के पहुंचने का वीडियो सामने आने के बाद छात्र समुदाय और समर्थकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे तानाशाही करार दे रहे हैं।
दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एहतियातन उठाया गया था। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम की खासी चर्चा हो रही है।
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