समृद्ध संस्कृति के बावजूद राजस्थानी सिनेमा क्यों पिछड़ा? बॉलीवुड एक्टर गौरव देवासी ने उठाई आवाज
राजस्थानी भाषा, समृद्ध लोक संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के बावजूद राजस्थानी सिनेमा आज तक वह मुकाम हासिल नहीं कर पाया है जिसका वह हकदार है। बॉलीवुड अभिनेता गौरव देवासी ने क्षेत्रीय सिनेमा की इस बदहाली पर चिंता जताते हुए फिल्म निर्माण के ढर्रे में बड़े बदलाव की वकालत की है।
जयपुर। राजस्थान की धरती अपनी समृद्ध भाषा, लोक संगीत, ऐतिहासिक शौर्य और अनूठी सांस्कृतिक पहचान के लिए दुनियाभर में विख्यात है। इसके बावजूद दशकों से यह सवाल अनुत्तरित रहा है कि आखिर राजस्थानी सिनेमा उस बड़े कैनवास और मुकाम तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?
बॉलीवुड अभिनेता गौरव देवासी ने राजस्थानी सिनेमा की मौजूदा स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सिनेमा को पुनर्जीवित करने के लिए अब पुराने ढर्रे और सीमित सोच से बाहर निकलना होगा। नए विचारों, आधुनिक तकनीक और मजबूत पटकथा (स्क्रिप्ट) के साथ काम किए बिना सिनेमाघरों में दर्शकों की वापसी संभव नहीं है।
"कहानियों की कमी नहीं, बड़े कैनवास पर उतारने की जरूरत"
गौरव देवासी ने कहा कि राजस्थान की माटी कहानियों से समृद्ध है:
अनूठे विषय मौजूद: लोक संस्कृति, परंपराएं, आमजन का संघर्ष, सामाजिक ताने-बाने और ग्रामीण परिवेश में ऐसी अनगिनत कहानियां मौजूद हैं जो बेहतरीन सिनेमा का आधार बन सकती हैं।
कैनवास का अभाव: विडंबना यह है कि इन विषयों को उस स्तर के सिनेमाई विजन और बड़े फलक पर प्रस्तुत ही नहीं किया गया, जिसकी ये हकदार हैं।
भाषा से आगे सोचें: उन्होंने रेखांकित किया कि केवल राजस्थानी भाषा में संवाद बुलवा देने से फिल्म नहीं चलती। कहानी की बुनावट, पटकथा, अभिनय, निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी का स्तर राष्ट्रीय सिनेमा के समकक्ष होना चाहिए।
'साउथ और पंजाबी सिनेमा से लें सीख'
देवासी ने भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा के दो सबसे सफल मॉडलों का हवाला दिया:
साउथ का विजन: दक्षिण भारतीय सिनेमा ने अपनी संस्कृति और जड़ों को पकड़े रखते हुए विश्वस्तरीय तकनीकी गुणवत्ता और बेहतरीन स्क्रीनप्ले के दम पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ी है।
पंजाबी सिनेमा की छलांग: पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री ने भी स्थानीय संगीत, हास्य और संस्कृति को आधुनिक पैकेजिंग के साथ पेश कर दुनियाभर में एक बड़ा बाजार खड़ा किया है।
उन्होंने कहा कि राजस्थानी फिल्मकारों को भी इन उद्योगों से सीख लेकर नए प्रयोगों और रिस्क लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
'पढ़े-लिखे और विजनरी मेकर्स आएं आगे'
अभिनेता ने जोर दिया कि इंडस्ट्री को पढ़े-लिखे, विजनरी और आधुनिक सिनेमा की समझ रखने वाले निर्देशकों और निर्माताओं की जरूरत है। स्थानीय कहानियों को इस तरह तराशा जाए ताकि आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z और युवा दर्शक) भी खुद को स्क्रीन पर दिखाई जा रही कहानी से जोड़ सके। सीमित दर्शक वर्ग के बजाय फिल्मों का लक्ष्य पैन-इंडिया स्तर का होना चाहिए।
गौरव देवासी की आगामी फिल्में: 'राधे कृष्णा' तैयार, 'द लास्ट ब्रीथ' का ऐलान
सिनेमा पर अपनी राय रखने के साथ ही अभिनेता गौरव देवासी ने अपने आगामी फिल्मी प्रोजेक्ट्स की जानकारी भी साझा की:
'राधे कृष्णा' की शूटिंग पूरी: उन्होंने बताया कि उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'राधे कृष्णा' की शूटिंग पूरी हो चुकी है और यह जल्द ही दर्शकों के सामने होगी।
'द लास्ट ब्रीथ' (The Last Breath): इसके अलावा उन्होंने हॉलीवुड स्टाइल और उसी तर्ज के कांसेप्ट पर आधारित अपनी नई फिल्म 'द लास्ट ब्रीथ' का भी आधिकारिक ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट को लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच काफी उत्सुकता देखी जा रही है।
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