Rajasthan News: राजस्थान में 9 बच्चों की मां की 10वीं डिलीवरी: हाई रिस्क में घर पहुंची प्रसूता, तो पीछे-पीछे दौड़ पड़ी स्वास्थ्य विभाग की टीम
राजस्थान से स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता और मिसाल पेश करने वाली एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश में 9 बच्चों की मां ने अपनी 10वीं संतान को जन्म दिया।
जयपुर। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर राजस्थान के स्वास्थ्य महकमे की एक बड़ी मुस्तैदी देखने को मिली है। प्रदेश में 9 बच्चों को पहले जन्म दे चुकी एक महिला की 10वीं डिलीवरी का मामला सामने आया है। अत्यधिक प्रसव और गंभीर शारीरिक कमजोरी के कारण महिला 'हाई रिस्क प्रेग्नेंसी' (High-Risk Pregnancy) की श्रेणी में थी। प्रसव के बाद जब महिला घर चली गई, तो उसकी जान का जोखिम देखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों की टीम तुरंत उसके घर पहुंची और मौके पर ही इलाज व देखभाल मुहैया कराई।
10वीं डिलीवरी और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार कई बार गर्भधारण करने और डिलीवरी होने से महिला के शरीर में गंभीर हीमोग्लोबिन की कमी (Anemia) और 'पोस्ट-पार्टम हेमरेज' (PPH - प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
हाई-रिस्क कैटेगरी: महिला की 10वीं डिलीवरी होने के कारण डॉक्टर उसे पूरी तरह से निगरानी में रखना चाहते थे।
अस्पताल से घर रवानगी: प्रसव के कुछ ही समय बाद, परिजनों और महिला ने अस्पताल में रुकने के बजाय घर जाने का फैसला किया, जिससे जच्चा और नवजात दोनों की जान पर संकट मंडराने लगा।
जैसे ही एएनएम (ANM), आशा सहयोगिनी और स्थानीय मेडिकल ऑफिसर को महिला के बिना पूर्ण मेडिकल डिस्चार्ज के घर पहुंचने की सूचना मिली, टीम बिना कोई वक्त गंवाए हरकत में आ गई:
तत्काल फॉलो-अप: टीम तुरंत प्रसूता के घर पहुंची और महिला के स्वास्थ्य मापदंडों (बीपी, हीमोग्लोबिन, और ब्लीडिंग) की जांच की।
मेडिकल किट और काउंसलिंग: नवजात और मां दोनों को आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं और पोषण संबंधी किट दी गई।
परिवार को दी गई हिदायत: स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने परिवार के सदस्यों को समझाते हुए बताया कि 10वीं डिलीवरी के बाद लापरवाही कितनी जानलेवा हो सकती है और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने को कहा।
परिवार नियोजन और जागरूकता की आवश्यकता
इस घटना ने एक तरफ जहां राजस्थान के जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (Frontline Health Workers) की मुस्तैदी और कर्तव्यनिष्ठा को सामने लाया है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में परिवार नियोजन (Family Planning) और मातृ स्वास्थ्य जागरूकता की कमी को भी उजागर किया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है: "बार-बार प्रसव से महिला का शरीर पूरी तरह से कमजोर हो जाता है। ऐसे मामलों में आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की सजगता ही मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate - MMR) को रोकने में सबसे बड़ी ढाल बनती है।"
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार महिला और उसके नवजात शिशु की स्थिति पर नजर बनाए हुए है, और दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
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