राजस्थान के स्कूलों में 'नो एंट्री' आदेश पर भारी बवाल: सदन में विपक्ष का हंगामा, सड़कों पर मारपीट; रविंद्र सिंह भाटी ने साधा भाजपा-कांग्रेस पर निशाना

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों, मीडिया और वीडियोग्राफी पर लगाए गए 'नो एंट्री' प्रतिबंध के आदेश पर प्रदेश में सड़क से लेकर विधानसभा सदन तक भारी बवाल मच गया है।

Aug 22, 2026 - 01:11
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राजस्थान के स्कूलों में 'नो एंट्री' आदेश पर भारी बवाल: सदन में विपक्ष का हंगामा, सड़कों पर मारपीट; रविंद्र सिंह भाटी ने साधा भाजपा-कांग्रेस पर निशाना
Rajasthan School Controversy

जयपुर। राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में बाहरी लोगों के प्रवेश, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी पर शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। यह विवाद अब केवल बयानों तक सीमित न रहकर सड़क पर मारपीट और विधानसभा सदन में जोरदार हंगामे में तब्दील हो चुका है।

जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा में स्कूल की बदहाली का जायजा लेने गए कार्यकर्ताओं पर हुए हमले के बाद मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने वेल में आकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस बीच, बाड़मेर के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी (Ravindra Singh Bhati) ने भी सरकार के इस फैसले और शिक्षा के गिरते स्तर पर कड़ा रुख अपनाया है।  

सदन में विपक्ष का जोरदार हंगामा: "पाप छिपाने के लिए ढक्कन कानून"

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर सदन परिसर और सदन के भीतर जोरदार प्रदर्शन किया:

नाकामियां छिपाने का आरोप: विपक्ष ने आरोप लगाया कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, टपकती छतें और जर्जर भवनों की दुर्दशा उजागर न हो, इसलिए शिक्षा मंत्री 'ढक्कन कानून' लेकर आए हैं।  

मुकदमों की धमकी: जूली ने कहा कि जो लोग स्कूलों की असलियत दिखा रहे हैं, उन पर राजकार्य में बाधा या पॉक्सो जैसे गंभीर केस लगाने की धमकियां दी जा रही हैं। विपक्ष ने इस तुगलकी फरमान को तत्काल वापस लेने की मांग की।  

रविंद्र सिंह भाटी का कड़ा रुख: "बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो"

निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और उस पर हो रही सियासत पर रोष व्यक्त किया:

बुनियादी ढांचा सुधारने की मांग: भाटी ने कहा कि सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में न तो पूरे शिक्षक हैं और न ही सुरक्षित भवन। प्रतिबंध लगाने से व्यवस्थाएं सुधरने वाली नहीं हैं।

सवालों से बचने का रास्ता: उन्होंने कहा कि जनता और जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के स्कूलों की हकीकत जानने का पूरा हक है। कमियों को दूर करने के बजाय कैमरों और लोगों की एंट्री बंद करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

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