राजस्थान में सोलर एनर्जी का नया मॉडल: 172 GSS पर लगेंगे मेगा बैटरी बैंक, दिन की सरप्लस बिजली रात में होगी सप्लाई

राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में घरों और व्यावसायिक इमारतों की छतों (Rooftop) पर लगे सोलर प्लांट से बनने वाली अतिरिक्त बिजली अब बेकार नहीं जाएगी।

Aug 23, 2026 - 23:18
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राजस्थान में सोलर एनर्जी का नया मॉडल: 172 GSS पर लगेंगे मेगा बैटरी बैंक, दिन की सरप्लस बिजली रात में होगी सप्लाई
Rajasthan solar energy pilot project

जयपुर। राजस्थान में सौर ऊर्जा के अधिकतम और प्रभावी उपयोग की दिशा में विद्युत वितरण निगमों ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में घरों और संस्थानों की छतों पर लगे रूफटॉप सोलर प्लांट्स (Rooftop Solar Plants) से दिन के समय पैदा होने वाली अतिरिक्त (Surplus) बिजली को अब बेकार जाने से रोकने के लिए NDTV Rajasthan की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में एक महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है।  

इस योजना के तहत डिस्कॉम के ग्रिड सब-स्टेशनों (GSS) पर उच्च क्षमता वाले मेगा बैटरी बैंक (Mega Battery Banks) स्थापित किए जाएंगे। दिन के वक्त सोलर पैनलों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली इन बैटरियों में स्टोर होगी, जिसका उपयोग शाम और रात के समय बिजली की मांग बढ़ने पर निर्बाध आपूर्ति के लिए किया जाएगा।  

172 जीएसएस का चयन: जोधपुर डिस्कॉम सबसे आगे

परियोजना के पहले चरण में तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के कुल 172 GSS को शामिल किया गया है:  

जोधपुर डिस्कॉम: सर्वाधिक 150 जीएसएस।  

जयपुर डिस्कॉम: 12 जीएसएस।  

अजमेर डिस्कॉम: 10 जीएसएस।  

प्राथमिकता के आधार पर जोधपुर, सीकर, झुंझुनूं, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जयपुर और उदयपुर के उन शहरी जीएसएस को चुना गया है, जहां रूफटॉप और वाणिज्यिक सोलर संयंत्रों का संकेंद्रण (घनत्व) सबसे अधिक है।

प्रोजेक्ट की 3 प्रमुख शर्तें और व्यवस्था  

सुरक्षित स्थान की उपलब्धता: बैटरी बैंक और कंट्रोल यूनिट लगाने के लिए जीएसएस ट्रांसफार्मर यार्ड के पास कम से कम 15 वर्ग मीटर खाली व सुरक्षित भूमि होना अनिवार्य है।  

10 साल का एमओयू: परियोजना लगाने वाली संबंधित फर्म के साथ 10 वर्ष की अवधि का अनुबंध किया जाएगा। 

सप्लाई और लोड मैनेजमेंट: बैटरी बैकअप पैनल बोर्ड तैयार कर जल्द ही इसका ट्रायल शुरू होगा, जिससे ग्रिड पर अतिरिक्त लोड का दबाव कम होगा और ट्रिपिंग की समस्या से निजात मिलेगी।  

उपभोक्ताओं और ग्रिड दोनों को होगा फायदा

इस तकनीक के लागू होने से सोलर ऊर्जा का नुकसान रुकेगा। आमतौर पर दिन में सोलर जनरेशन अधिक होने और स्थानीय खपत कम होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड प्रबंधन में असंतुलन पैदा करती थी। अब ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के जरिए यह बिजली सुरक्षित रहेगी और पीक आवर्स (Peak Hours) में पारंपरिक बिजली खरीद पर होने वाला करोड़ों रुपये का खर्च भी बचेगा।

राजस्थान में सौर ऊर्जा के विस्तार और रूफटॉप सोलर अपनाने की दिशा में प्रगति को समझने के लिए पीएम सूर्य घर योजना में राजस्थान ने पार किया बड़ा मुकाम वीडियो को देखा जा सकता है।

यह वीडियो राजस्थान में रूफटॉप सोलर प्लांट्स के तेजी से बढ़ते नेटवर्क और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रयासों को दर्शाता है।

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