Rajasthan News: ACB की FIR में 'डॉक्टर' और 'सतीश PA' का जिक्र होने पर मचा बवाल, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मांगी सफाई

राजस्थान के बहुचर्चित नकली बीज और घूसकांड (Seed Scam) मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एफआईआर (FIR) के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है।

Jun 19, 2026 - 20:26
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Rajasthan News: ACB की FIR में 'डॉक्टर' और 'सतीश PA' का जिक्र होने पर मचा बवाल, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मांगी सफाई
Dr Kirodi lal Meena

जयपुर। राजस्थान के कृषि विभाग में नकली खाद-बीज माफियाओं के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में तब्दील हो चुकी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) में कुछ संदिग्ध नामों और पदों के सांकेतिक जिक्र ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एफआईआर में एक जगह 'डॉक्टर' (Dr.) और 'सतीश PA' (Satish PA) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिसके बाद विभाग और सरकार के स्तर पर जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।  

इस पूरे घटनाक्रम पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कड़ा संज्ञान लेते हुए एसीबी के उच्चाधिकारियों से इस संबंध में लिखित स्पष्टीकरण (Clarification) मांगा है।  

क्या है एफआईआर (FIR) का पूरा विवाद?

दरअसल, पिछले दिनों कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की पहल पर नकली और घटिया बीज बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ प्रदेशव्यापी छापेमारी की गई थी। इसी कार्रवाई की आड़ में कंपनियों को राहत देने और लैब रिपोर्ट को पक्ष में कराने के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही का खेल सामने आया।

एसीबी ने राजस्थान स्टेट सीड्स कॉरपोरेशन (बीज निगम) के मनोनीत डायरेक्टर जुगल किशोर बिश्नोई और उसके भांजे को 2.44 करोड़ रुपये की भारी नकदी के साथ गिरफ्तार किया था।  

इस मामले में दर्ज एफआईआर में कथित तौर पर कुछ बिचौलियों और रसूखदारों के नाम सामने आए, जिसमें 'सतीश PA' और 'डॉक्टर' शब्द का उल्लेख होने से यह मामला हाई-प्रोफाइल हो गया।  

कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का पलटवार: 'सुई की नोक के बराबर भी संबंध नहीं'

इस विवाद पर खुद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने आगे आकर स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम उन्होंने खुद शुरू की थी और बीज निगम के भ्रष्ट डायरेक्टर को भी उन्हीं की सूचना पर पकड़ा गया था।

मंत्री का बयान: "एसीबी की एफआईआर में एक जगह 'डॉक्टर' छपा है, जो संभवतः किसी लैब या तकनीकी विंग से जुड़ा व्यक्ति हो सकता है। यदि इस पूरे मामले में मेरा या मेरे किसी करीबी का सुई की नोक के बराबर भी लेना-देना पाया गया, तो मैं तत्काल अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा। मैंने एसीबी से कहा है कि वे इन शब्दों और नामों पर पूरी स्थिति स्पष्ट करें ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।"

विपक्ष को मिला सरकार को घेरने का मौका

एसीबी की एफआईआर में आए इन नए तथ्यों के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका मिल गया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि नकली खाद-बीज के खिलाफ कार्रवाई महज एक दिखावा थी, जिसकी आड़ में विभागीय अधिकारियों और मंत्रियों के करीबियों द्वारा कंपनियों से मोटी रकम वसूलने का एक संगठित सिंडिकेट चलाया जा रहा था।

फिलहाल, एसीबी के महानिदेशक (DG) के निर्देशन में टीम सभी तकनीकी दस्तावेजों, कॉल डिटेल्स (CDR) और गिरफ्तार आरोपियों के बयानों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मंत्री की मांग के बाद अब देखना होगा कि एसीबी इस 'डॉक्टर' और 'सतीश PA' की गुत्थी को कब तक सुलझाकर आधिकारिक रिपोर्ट पेश करती है।

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