'5 ही जगह Gen अल्फा ने किया प्रदर्शन तो पसीने आ गए!' स्कूलों में वीडियो पर लगे बैन पर बोले टीकाराम जूली
राजस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर लगाए गए कड़े प्रतिबंध के आदेश पर प्रदेश में भारी सियासी घमासान छिड़ गया है।
जयपुर। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश, बिना अनुमति फोटो खींचने और वीडियो बनाने पर लगाए गए कड़े प्रतिबंध ने बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इस सरकारी फरमान को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला और सरकार की बदहाली छिपाने की कोशिश करार दिया है।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) ने इस आदेश पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखा तंज कसा है।
"नाकामी छिपाने के लिए निकाला तानाशाही फरमान" - टीकाराम जूली
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया और प्रेस बयानों के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
Gen Alpha से डरी सरकार: जूली ने कहा, "प्रदेश में सिर्फ 4-5 जगहों पर Gen अल्फा (स्कूली छात्र-छात्राओं) ने तालाबंदी कर शिक्षकों की कमी और बदहाल व्यवस्था पर सवाल क्या उठाए, सरकार के पसीने छूट गए। युवाओं (Gen Z) से घबराने के बाद अब बीजेपी सरकार छोटे-छोटे मासूम स्कूली बच्चों से भी डरने लगी है।"
कमियों को छुपाने का नुस्खा: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, टपकती कक्षाओं और जर्जर भवनों की मरम्मत करने के बजाय सरकार ने सच्चाई को छिपाने का सबसे आसान तरीका खोजा है— स्कूलों में कैमरे और मीडिया पर बैन लगाना।
सविनय अवज्ञा आंदोलन की चेतावनी: जूली ने इस आदेश को पूरी तरह तानाशाही बताते हुए इसे तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया तो विपक्ष और जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका कड़ा विरोध करेगी।
विवाद की वजह: शिक्षा विभाग का नया आदेश
हाल ही में अलवर, दूदू और सीकर सहित कई जिलों के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों के रिक्त पदों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर स्कूल के मुख्य गेट पर ताले जड़ दिए थे। कई छात्राओं के सवाल पूछते और अधिकारियों को घेरते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए:
बिना अनुमति नो-एंट्री: संस्था प्रधान (प्रिंसिपल) की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति या मीडियाकर्मी स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं करेगा।
वीडियो और फोटोग्राफी पर रोक: स्कूल परिसर में कक्षा के दौरान फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।
कांग्रेस का चौतरफा हमला
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और कांग्रेस नेताओं ने भी इस मामले में सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता और अभिभावकों को अपने बच्चों के स्कूल की स्थिति जानने का पूरा अधिकार है। विपक्ष का आरोप है कि व्यवस्थाएं सुधारने के बजाय शिक्षा मंत्री पर्दा डालने की राजनीति कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के पूरे आसार हैं।
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