Rajasthan News: पांचना बांध विवाद पर सचिन पायलट का बड़ा बयान, बोले- 'अदालत के निर्णय का सम्मान और पालना होनी चाहिए'
करौली के सुप्रसिद्ध पांचना बांध जल विवाद पर कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने एक बड़ा और संतुलित बयान दिया है।
करौली। पूर्वी राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध से पानी छोड़ने को लेकर चल रहे 'गुर्जर बनाम मीणा' के 20 साल पुराने जल विवाद (Water War) पर अब प्रदेश के सबसे लोकप्रिय युवा नेता और टोंक विधायक सचिन पायलट की भी एंट्री हो गई है। बांध के पानी को लेकर बने तनावपूर्ण माहौल के बीच सचिन पायलट ने कानून और न्याय व्यवस्था का पक्ष लेते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है।
सचिन पायलट ने इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बात करते हुए कहा, "पांचना बांध को लेकर जो भी गतिरोध चल रहा है, उसमें कोर्ट (राजस्थान हाईकोर्ट) के निर्णय की पालना की जानी चाहिए। अदालत के फैसले सर्वोपरि हैं और सभी पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए।"
पायलट के बयान के सियासी और सामाजिक मायने
पूर्वी राजस्थान की राजनीति को करीब से समझने वाले विश्लेषकों का मानना है कि सचिन पायलट का यह बयान बेहद नपा-तुला और दूरदर्शी है:
1. दोनों समुदायों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
पांचना बांध विवाद मुख्यतः डूब क्षेत्र के 39 गांवों (गुर्जर बहुल) और कमांड क्षेत्र के 35 गांवों (मीणा बहुल) के बीच है। सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से आते हैं और पूर्वी राजस्थान के मीणा समुदाय में भी उनकी राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। ऐसे में किसी एक पक्ष का सीधा समर्थन करने के बजाय 'कोर्ट के आदेश' की वकालत करना उनके राजनीतिक कद और दोनों वर्गों में उनकी स्वीकार्यता को बनाए रखने के लिए सबसे सही कदम माना जा रहा है।
2. प्रशासन पर कानूनी पालना का दबाव
पायलट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार और स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अदालत के आदेशों को धरातल पर लागू करवाएं। उनका यह इशारा सत्ताधारी भाजपा सरकार की ओर भी है कि वे कानून-व्यवस्था को बनाए रखते हुए इस संवेदनशील जल संकट का ऐसा समाधान निकालें जिससे किसी भी वर्ग में असंतोष की भावना न पनपे।
क्या है मौजूदा स्थिति? राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती के बाद करौली जिला प्रशासन नहरों की सफाई करवाकर पानी छोड़ने की तैयारी में है। हालांकि, बांध पर डटे 39 गांवों के प्रदर्शनकारी अपनी 'लिफ्ट सिंचाई परियोजना' की मांग पर अड़े हैं। वहीं, 35 गांवों के किसान पानी का इंतजार कर रहे हैं।
शांतिपूर्ण समाधान की अपील
सचिन पायलट ने उम्मीद जताई कि प्रशासन दोनों पक्षों के किसान प्रतिनिधियों को एक टेबल पर बिठाकर बातचीत के माध्यम से बीच का रास्ता निकालेगा। उन्होंने कहा कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि नियमों और अदालती आदेशों के तहत सभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचे, यही प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि पायलट के इस 'कोर्ट के निर्णय की पालना' वाले बयान के बाद आंदोलनरत गुर्जर और मीणा बाहुल्य संघर्ष समितियों का अगला कदम क्या होता है और भजनलाल सरकार इस अदालती आदेश को किस प्रकार लागू करवाती है।
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