मेरे खिलाफ साजिश हुई, कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोका'- अशोक गहलोत का 25 सितंबर की घटना पर धमाकेदार दावा

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 25 सितंबर 2022 को हुए सियासी घटनाक्रम को लेकर एक बड़ा और धमाकेदार दावा किया है। गहलोत का कहना है कि उनके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश रची गई थी, जिसका मुख्य मकसद उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोकना था।

Jun 8, 2026 - 00:16
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मेरे खिलाफ साजिश हुई, कांग्रेस अध्यक्ष बनने से रोका'- अशोक गहलोत का 25 सितंबर की घटना पर धमाकेदार दावा
Ashok Gehlot

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने साल 2022 के उस बहुचर्चित सियासी घटनाक्रम पर एक बार फिर बात की है, जिसने देश भर की राजनीति को गरमा दिया था। गहलोत ने एक बड़ा और सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि 25 सितंबर 2022 को जयपुर में जो कुछ भी हुआ, वह उनके खिलाफ रची गई एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। उनका आरोप है कि इस साजिश के जरिए उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोका गया।

क्या है 25 सितंबर 2022 का पूरा घटनाक्रम?

गौरतलब है कि सितंबर 2022 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें अशोक गहलोत को गांधी परिवार की पसंद और सबसे मजबूत उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा था। इसी सिलसिले में 25 सितंबर 2022 को जयपुर में मुख्यमंत्री आवास पर कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक आधिकारिक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन बतौर पर्यवेक्षक दिल्ली से जयपुर पहुंचे थे।

माना जा रहा था कि इस बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पास कर मुख्यमंत्री का फैसला आलाकमान पर छोड़ा जाना था, ताकि गहलोत के अध्यक्ष बनने के बाद सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सके। लेकिन, खेल ऐन वक्त पर पलट गया।

गहलोत गुट के विधायकों ने कर दिया था विद्रोह

आलाकामान के इस संभावित फैसले के विरोध में अशोक गहलोत गुट के माने जाने वाले करीब 90 से अधिक विधायक तत्कालीन मंत्री शांति धारीवाल के बंगले पर इकट्ठा हो गए। इन विधायकों ने आधिकारिक बैठक का बहिष्कार कर दिया और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के आवास पर जाकर अपने इस्तीफे सौंप दिए। विधायकों की मांग थी कि नया मुख्यमंत्री 2020 के सियासी संकट में सरकार बचाने वाले विधायकों में से ही कोई होना चाहिए, न कि बगावत करने वाले (सचिन पायलट) गुट से। इस अप्रत्याशित बगावत के बाद गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस से बाहर हो गए और बाद में मल्लिकार्जुन खड़गे को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया।

"साजिशकर्ताओं का हुआ भंडाफोड़"

अब इस पूरे घटनाक्रम पर दोबारा बोलते हुए अशोक गहलोत ने साफ किया है कि विधायकों का वह असंतोष स्वतः स्फूर्त नहीं था, बल्कि उनके पैर खींचने की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश थी। गहलोत ने बिना किसी का नाम लिए संकेत दिया कि पार्टी के भीतर और बाहर कुछ ताकतें नहीं चाहती थीं कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बैठें।

गहलोत के इस धमाकेदार दावे ने राजस्थान कांग्रेस की उस पुरानी गुटबाजी और कड़वाहट की यादें ताजा कर दी हैं, जिससे पार्टी लंबे समय तक जूझती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति और कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों में एक बार फिर नया उबाल देखने को मिल सकता है।

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