राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से: शुरू होने से पहले ही सत्तापक्ष और विपक्ष में छिड़ा घमासान, सत्र की अवधि को लेकर तकरार
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से शुरू हो रहा है, लेकिन सत्र की शुरुआत से पहले ही सत्ता पक्ष (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल (कांग्रेस) के बीच तीखा विवाद शुरू हो गया है।
जयपुर। राजस्थान की 16वीं विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से शुरू होने जा रहा है, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव चरम पर पहुंच गया है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में आयोजित सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) में सदन की अवधि और चर्चा के मुद्दों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
विपक्ष ने जहां सत्र को कम से कम 20 से 25 दिन चलाने की मांग रखी है, वहीं सरकार ने आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की व्यस्तता का हवाला देते हुए सत्र को सीमित रखने के संकेत दिए हैं।
सत्र की अवधि पर तकरार: लंबा सत्र चाहता है विपक्ष
सर्वदलीय बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए:
"चर्चा से भाग रही सरकार": टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार जनता और युवाओं से जुड़े मुद्दों का जवाब देने से डर रही है। उन्होंने कहा, "विपक्ष चाहता है कि सदन कम से कम 20 से 25 दिन चले ताकि प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं पर खुलकर चर्चा हो सके। लेकिन सरकार चुनाव का बहाना बनाकर सत्र को महज कुछ दिनों (25 अगस्त तक) में समेटने की तैयारी में है।"
चुनावी कार्यक्रमों का हवाला: वहीं, संसदीय कार्य मंत्री और सत्तापक्ष का तर्क है कि राज्य में नगर निकाय और पंचायत चुनावों की प्रक्रियाएं सामने हैं, ऐसे में विधायकों को अपने क्षेत्रों में जाना होगा, इसलिए जरूरी विधायी कार्य पूरे कर सत्र को सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा।
विपक्ष के पास मुद्दों की लंबी फेहरिस्त
कांग्रेस और विपक्षी दलों ने मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है:
छात्रों और स्कूलों की स्थिति: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद, बुनियादी सुविधाओं की कमी, स्कूलों में वीडियोग्राफी/मीडिया बैन का आदेश और छात्र राजनीति के मुद्दे।
समान नागरिक संहिता (UCC) व विधायी बिल: सरकार द्वारा लाए जाने वाले संभावित विधेयकों और नीतिगत फैसलों पर कड़ा रुख।
ओबीसी आरक्षण व स्थानीय चुनाव: हालिया ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण निर्धारण को लेकर उपजा विवाद।
कानून-व्यवस्था और जनहित: प्रदेश में अपराध नियंत्रण, किसानों के मुद्दे और प्रशासनिक जवाबदेही पर सत्तापक्ष से जवाब मांगा जाएगा।
स्पीकर ने की सदन को शांतिपूर्ण चलाने की अपील
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी दलों के नेताओं से सदन की गरिमा बनाए रखने और जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस करने का आह्वान किया है।
20 अगस्त को सत्र के पहले दिन पूर्व दिवंगत नेताओं को शोकाभिव्यक्ति (Obituary References) दी जाएगी, जिसके बाद कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक में सत्र का अंतिम कार्यदिवस कैलेंडर तय किया जाएगा। हालांकि, पहले दिन से ही दोनों पक्षों के तेवरों को देखते हुए मानसून सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं।
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