Rajasthan News: नेता ने अशोक गहलोत को कहा 'बूढ़ा', सचिन पायलट को 'बॉस' बनाने की उठी मांग

राजस्थान कांग्रेस में 'गहलोत बनाम पायलट' की पुरानी अदावत एक बार फिर सतह पर आ गई है। दौसा में आयोजित एक बैठक के दौरान एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को 'बूढ़ा' बताते हुए सचिन पायलट को प्रदेश का नया 'बॉस' (नेतृत्वकर्ता) बनाने का खुला समर्थन किया है।

Jun 9, 2026 - 21:29
 0
Rajasthan News: नेता ने अशोक गहलोत को कहा 'बूढ़ा', सचिन पायलट को 'बॉस' बनाने की उठी मांग
Sachin pilot vs Ashok Gehlot

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में सब कुछ ठीक होने के दावों के बीच एक बार फिर अंदरूनी गुटबाजी और कलह खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश की सियासत में 'गहलोत बनाम पायलट' का वह पुराना विवाद फिर से सुलग उठा है, जिसने पिछले पांच सालों तक कांग्रेस सरकार को अस्थिर रखा था। ताजा मामला दौसा से जुड़ा है, जहां एक कांग्रेस नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की उम्र पर तंज कसते हुए सचिन पायलट को 'बॉस' बनाने की वकालत कर दी है।

दौसा की बैठक और 'बूढ़ा' वाला तंज

जानकारी के अनुसार, दौसा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की एक अहम बैठक (The Inside Story of the Dausa Meeting) चल रही थी। इसी दौरान मंच से बोलते हुए एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने बेबाकी से अपनी बात रखी और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा निशाना साधा।

नेता ने खुलेआम कहा कि अशोक गहलोत अब 'बूढ़े' हो चुके हैं और पार्टी को अब युवाओं के हाथ में कमान सौंपनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सचिन पायलट का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस का 'बॉस' (सर्वमान्य नेता) मान लेना चाहिए।

'युवाओं की मांग हैं सचिन पायलट'

इस बैठक में पायलट समर्थकों ने जोरदार तरीके से यह बात उठाई कि पिछले विधानसभा चुनाव में हार का मुख्य कारण नेतृत्व में बदलाव न होना था। पायलट समर्थकों का तर्क है कि सचिन पायलट युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं और उनके नेतृत्व में ही पार्टी प्रदेश में दोबारा मजबूती से खड़ी हो सकती है। इस बयान के बाद बैठक में मौजूद गहलोत समर्थकों और पायलट समर्थकों के बीच असहज स्थिति पैदा हो गई।

राजस्थान कांग्रेस क्राइसिस 2.0 का अंदेशा?

इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में 'राजस्थान कांग्रेस क्राइसिस 2.0' (Rajasthan Congress Crisis 2.0) की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

साल 2020 में सचिन पायलट की बगावत।

साल 2022 में गहलोत गुट के विधायकों का इस्तीफा (25 सितंबर की घटना)।

इन घटनाओं के बाद आलाकमान ने दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने की कई कोशिशें की थीं। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले दोनों ने 'हम साथ-साथ हैं' का संदेश भी दिया था, लेकिन सत्ता से बाहर होते ही यह दरार फिर से चौड़ी होती दिख रही है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) या दोनों ही दिग्गज नेताओं की तरफ से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन दौसा जैसी जगह—जो सचिन पायलट के प्रभाव वाला क्षेत्र (गुर्जर बाहुल्य) माना जाता है—वहां से उठी यह आवाज इस बात का साफ संकेत है कि राजस्थान कांग्रेस में वर्चस्व की जंग अभी खत्म नहीं हुई है। भाजपा भी कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान पर करीब से नजर बनाए हुए है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0