Rajasthan News: "पंचायत और निकाय चुनाव टालने की हो रही साजिश", पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का भजनलाल सरकार और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला
राजस्थान में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय (Urban Body) चुनावों को लेकर सियासी रार बढ़ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने राज्य चुनाव आयोग और मौजूदा भजनलाल सरकार पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है।
जयपुर। राजस्थान की सियासत में स्थानीय स्तर के चुनावों (Local Body Elections) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा (Sanyam Lodha) ने राज्य की भाजपा सरकार और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) को आड़े हाथों लिया है। लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की भजनलाल सरकार और चुनाव आयोग जानबूझकर पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनावों में देरी कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
"हार के डर से भाग रही है भाजपा सरकार"
संयम लोढ़ा ने इस प्रशासनिक देरी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में कई ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त होने को है या हो चुका है, लेकिन चुनाव की तैयारियों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।
खिसक रही है राजनीतिक जमीन: लोढ़ा का दावा है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों और ग्रामीण अंचल में बढ़ते असंतोष के बाद भाजपा सरकार डरी हुई है। उन्हें डर है कि अगर अभी चुनाव हुए तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनता उन्हें नकार देगी।
अधिकारियों पर दबाव का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर ही वार्डों के पुनर्गठन (Delimitation) और मतदाता सूची (Voter List) के पुनरीक्षण जैसे कामों को जानबूझकर कछुआ गति से चलाया जा रहा है ताकि चुनावों को जितना हो सके आगे खिसकाया जा सके।
संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल
कांग्रेस नेता ने केवल सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
आयोग की चुप्पी पर हैरानी: लोढ़ा ने कहा कि समय पर निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। लेकिन आयोग इस मामले में मूकदर्शक बनकर सरकार के इशारों का इंतजार कर रहा है।
प्रशासकों के भरोसे चल रहे निकाय: चुनावों में देरी के कारण स्थानीय निकायों और पंचायतों की कमान निर्वाचित प्रतिनिधियों के बजाय सरकारी प्रशासकों (Administrators) के हाथों में जा रही है। इससे आम जनता के रोजमर्रा के काम ठप हो रहे हैं और विकास कार्यों की गति धीमी हो गई है।
विपक्ष की चेतावनी: संयम लोढ़ा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने जल्द ही चुनावों के कार्यक्रम (Election Schedule) की घोषणा नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेगी और इस मामले को कानूनी रूप से कोर्ट में भी चुनौती दी जाएगी।
इस बयान के बाद राजस्थान के राजनीतिक हलकों में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तीखी हो सकती है।
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