Rajasthan Politics: गहलोत के 'इंतजार शास्त्र' पर CM भजनलाल का तीखा पलटवार, बोले- 'ये आपका झूठ का शास्त्र है'
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 'इंतजार शास्त्र' सीरीज पर सीएम भजनलाल शर्मा ने तीखा पलटवार किया है। सीएम ने इसे 'झूठ और भ्रष्टाचार का शास्त्र' बताते हुए कांग्रेस राज के पेपर लीक और JJM घोटालों की याद दिलाई। साथ ही, उन्होंने सचिन पायलट और परिवारवाद का जिक्र करते हुए गहलोत पर तंज कसा कि 'नकारा-निकम्मा' कहे जाने वाले नेताओं की दिल्ली में पूछ बढ़ने से गहलोत तड़प रहे हैं।
जयपुर। राजस्थान की सियासत में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सोशल मीडिया सीरीज 'इंतजार शास्त्र' (Intezaar Shastra) ने एक नया सियासी बवंडर खड़ा कर दिया है। गहलोत इस सीरीज के जरिए लगातार रुकी हुई भर्तियों और अटके हुए प्रोजेक्ट्स को लेकर भजनलाल सरकार पर निशाना साध रहे हैं। अब इस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जोरदार पलटवार किया है। सीएम शर्मा ने गहलोत के इस अभियान को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'झूठ का शास्त्र' और 'भ्रष्टाचार का शास्त्र' करार दिया है।
हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूर्व सीएम पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि केवल घर बैठकर ट्वीट करने से सरकारें नहीं चलतीं, बल्कि जमीन पर काम करना पड़ता है (कर्मशास्त्र)। गहलोत सरकार के कार्यकाल की खामियां गिनाते हुए सीएम ने कहा, "जिन्होंने जल जीवन मिशन (JJM) में घोटाला किया और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए बार-बार पेपर लीक करवाए, वे आज 'इंतजार शास्त्र' की बात कर रहे हैं। असल में यह उनका झूठ फैलाने का तरीका है।"
'नकारा-निकम्मा' और 'परिवारवाद' पर तीखा तंज
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सिर्फ पुरानी योजनाओं पर ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने सचिन पायलट के संदर्भ में गहलोत के पुराने बयानों की याद दिलाते हुए तंज कसा- "कांग्रेस सरकार में जिन नेताओं को 'नकारा और निकम्मा' कहा गया था, आजकल उनकी दिल्ली (आलाकमान के सामने) बहुत चल रही है। यही कारण है कि 'इंतजार शास्त्र' वाले नेता आज तड़प रहे हैं, क्योंकि उन्हें आलाकमान के बुलावे का इंतजार है।"
इसके अलावा, सीएम शर्मा ने परिवारवाद के मुद्दे पर सोनिया गांधी और अशोक गहलोत पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों ही नेता अपने बेटों को बार-बार राजनीति में 'लॉन्च' करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता उन्हें नकार रही है और नतीजा हमेशा 'ढाक के तीन पात' ही रहता है।
कुल मिलाकर, गहलोत के अटके हुए विकास कार्यों (जैसे चौंप स्टेडियम और सैटेलाइट अस्पताल) के सवालों से शुरू हुई यह बहस अब भ्रष्टाचार, परिवारवाद और व्यक्तिगत आक्षेपों तक पहुंच चुकी है। दोनों ही दल अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में यह टकराव और भी उग्र रूप लेगा।
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