राजस्थान पॉलिटिक्स: अजमेर में भावुक वसुंधरा राजे ने कहा “पद मेरा नहीं, जनता का है… जीत‑हार नहीं, सेवा ही मेरी राजनीति"
Rajasthan politics: अजमेर में एक लोकल टीवी चैनल से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भावुक हो गईं और कहा कि उन्होंने कभी पद को अपना नहीं माना, यह जनता का है और जब तक लोग उन्हें परिवार की तरह मानते रहेंगे, वे उनके बीच ही रहेंगी।
जयपुर। अजमेर में एक लोकल टीवी चैनल से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि उन्होंने कभी पद को अपना नहीं माना, यह जनता का है और जब तक लोग उन्हें अपना परिवार मानते हैं, वे उनके बीच बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि 20 से ज्यादा वर्षों में लोगों से बना यह रिश्ता ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है और जनता का स्नेह उनके लिए “हाउ लकी आई एम” जैसा अहसास देता है.
जीत‑हार से ऊपर सेवा की राजनीति
राजे ने अपनी राजनीति को सीधी‑सीधी सेवा से जोड़ते हुए कहा कि उनकी राजनीति जीत और हार के गणित पर नहीं, जनता की भलाई पर चलती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वे बजट को ऐसे देखती हैं जैसे घर की महिला पैसे को संभालती है-जो पैसा है, वह जनता पर खर्च होना चाहिए, तभी असली काम होता है।
आरोपों, नैतिकता और रिश्तों पर संदेश
पुराने भ्रष्टाचार आरोपों का ज़िक्र करते हुए राजे ने तंज में कहा कि विपक्ष ने उन पर 20,000 करोड़ “खाने” के आरोप लगाए थे, जबकि उन्हें यह भी नहीं पता कि उसमें कितने जीरो होते हैं। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि जो लोग दो पक्षों को आपस में लड़वाकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं, उनका फायदा कुछ समय का होता है, भगवान भी ऐसे लोगों का साथ नहीं देता; लंबे समय तक रिश्ते केवल प्यार और सम्मान से ही चलते हैं।
वहीं ये भी जानना महत्वपूर्ण है कि अजमेर में दिया गया यह भावुक इंटरव्यू ऐसे समय पर आया है जब राजस्थान बीजेपी में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। राजे के “पद जनता का है” और “सेवा ही राजनीति है” जैसे बयान को राजनीतिक गलियारों में अपनी प्रासंगिकता के सॉफ्ट‑सिग्नल और कार्यकर्ताओं के बीच भावनात्मक कनेक्ट के रूप में भी देखा जा रहा है।
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