Rajasthan News: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की 'ओछी' बयानबाजी, डोटासरा को कहा 'बेईमान और बेशर्म', पद को नहीं देता शोभा
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक बार फिर अपने विवादित बयानों से राजनीतिक शिष्टाचार और मर्यादाओं को ताक पर रख दिया है।
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में तीखी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब संवैधानिक और गरिमामयी पदों पर बैठे लोग सड़क-छाप भाषा पर उतर आएं, तो यह लोकतंत्र और उस पद दोनों का अपमान है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने एक बार फिर कुछ ऐसा ही किया है। राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को घेरने के चक्कर में दिलावर ने भाषाई मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं और उन्हें सरेआम "बेईमान और बेशर्म" कह डाला।
शिक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा की गई यह ओछी हरकत राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच कड़ी आलोचना का विषय बन गई है।
शिक्षा मंत्री के पद को शोभा नहीं देती ऐसी भाषा
मदन दिलावर के पास राजस्थान के 'शिक्षा और पंचायती राज' विभाग का जिम्मा है। एक शिक्षा मंत्री को प्रदेश के लाखों छात्रों, युवाओं और शिक्षकों के लिए एक आदर्श (Role Model) माना जाता है। उनके कंधों पर भावी पीढ़ी को संस्कार और शिष्टाचार सिखाने की जिम्मेदारी होती है।
लेकिन, जब वही शिक्षा मंत्री अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ 'बेईमान', 'बेशर्म' और व्यक्तिगत छींटाकशी जैसे ओछे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे न केवल उनका अपना राजनीतिक कद छोटा होता है, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग और पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचती है।
राजनीतिक द्वेष में भूल गए शिष्टाचार
मदन दिलावर और गोविंद सिंह डोटासरा के बीच लंबे समय से जुबानी जंग चलती आ रही है। दोनों नेता अक्सर एक-दूसरे पर तीखे प्रहार करते हैं। लेकिन लोकतांत्रिक विरोध का एक स्तर होता है। नीतिगत आलोचना की जगह जब बात सीधे तौर पर गालियों या असभ्य शब्दों तक पहुंच जाए, तो यह दर्शाता है कि मंत्री वैचारिक बहस के बजाय व्यक्तिगत खुन्नस निकालने पर उतारू हैं।
आम जनता में जा रहा है गलत संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों का मानना है कि सत्ता पक्ष के एक वरिष्ठ मंत्री को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए।
क्या एक शिक्षा मंत्री का काम सिर्फ विपक्षियों को कोसना और अपशब्द कहना रह गया है?
इस तरह की ओछी बयानबाजी से प्रदेश के युवाओं और स्कूली बच्चों में क्या संदेश जाएगा?
मदन दिलावर का यह बयान स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वे अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी को भूलकर महज सस्ती लोकप्रियता और सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की हल्की बयानबाजी कर रहे हैं। विपक्ष भले ही सरकार की कितनी भी आलोचना करे, लेकिन सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी भाषा ही उनके व्यक्तित्व और सरकार के काम करने के तरीके का आईना होती है। दिलावर की यह हरकत निश्चित तौर पर निंदनीय है और एक मंत्री को कतई शोभा नहीं देती।
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