Rajasthan News: कोटा में सिस्टम से हारीं 5 प्रसूताएं, राष्ट्रपति से मांगी 'इच्छा मृत्यु'; 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने से प्रशासन में हड़कंप
राजस्थान के कोटा से एक बेहद चौंकाने वाला और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां सिस्टम की अनदेखी और न्याय न मिलने से परेशान होकर 5 प्रसूताओं (महिलाओं) ने सीधे देश के राष्ट्रपति से 'इच्छा मृत्यु' (Euthanasia) की इजाजत मांगी है।
कोटा। राजस्थान के कोटा (Kota) जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता की पोल खोल कर रख दी है। अपनी जायज मांगों और शिकायतों पर कोई सुनवाई न होने से हताश 5 प्रसूताओं (माताओं) ने एक बेहद कड़ा और दर्दनाक कदम उठाया है। न्याय की कोई उम्मीद न बचती देख, इन महिलाओं ने सीधे भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर 'इच्छा मृत्यु' की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला और क्यों उठी इच्छा मृत्यु की मांग?
यह पूरा मामला सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की नाकामी और मरीजों की अनदेखी से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, ये महिलाएं अस्पताल प्रशासन और सिस्टम की लचर कार्यप्रणाली से बेहद आहत हैं।
सिस्टम से हताशा: उचित सुनवाई, न्याय या अपनी जायज शिकायतों का समाधान न होने के चलते इन महिलाओं को यह अतिवादी कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।
राष्ट्रपति से लगाई गुहार: दर-दर भटकने और सिस्टम से हार मान चुकीं इन 5 महिलाओं ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राष्ट्रपति) को पत्र लिखा है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि उनके साथ न्याय नहीं हो सकता और उनकी सुनवाई नहीं हो सकती, तो उन्हें सम्मान के साथ अपनी जीवनलीला समाप्त करने (इच्छा मृत्यु) की कानूनी अनुमति दी जाए।
48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म, प्रशासन के उड़े होश
इन महिलाओं ने अपने पत्र और विरोध के माध्यम से स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को स्थिति सुधारने और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 48 घंटे का स्पष्ट अल्टीमेटम (Ultimatum) दिया था।
अधिकारियों की बेरुखी: हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर चेतावनी और मामले की संवेदनशीलता के बावजूद तय समय सीमा बीत जाने तक उनकी समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।
अब महकमे में हड़कंप: जैसे ही 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म हुआ और इच्छा मृत्यु की मांग वाली यह खबर मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैली, वैसे ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए।
इस घटना ने कोटा में आम आदमी और मरीजों के प्रति सिस्टम के रवैये पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अल्टीमेटम खत्म होने के बाद राज्य सरकार और उच्चाधिकारी इस मामले में कोई ठोस और त्वरित कदम उठाएंगे, या फिर इन महिलाओं को यूं ही सिस्टम से लड़ते हुए छोड़ दिया जाएगा।
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