Rajasthan News: 'गहलोत साहब! 75 के बाद संन्यास का समय होता है', 'इंतजार शास्त्र' पर BJP प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का कड़ा प्रहार

राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत की उम्र और 'इंतजार शास्त्र' पर करारा तंज कसा है। राठौड़ ने गहलोत को राजनीति छोड़कर 'संन्यास आश्रम' में जाने और 'संतोष शास्त्र' अपनाने की नसीहत दी।

Mar 31, 2026 - 20:58
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Rajasthan News: 'गहलोत साहब! 75 के बाद संन्यास का समय होता है', 'इंतजार शास्त्र' पर BJP प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का कड़ा प्रहार
Madan Rathore vs Ashok Gehlot

जयपुर। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सोशल मीडिया सीरीज 'इंतजार शास्त्र' (Intezaar Shastra) से शुरू हुई सियासी जंग हर दिन तीखी होती जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बाद अब राजस्थान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ (Madan Rathore) ने गहलोत पर बेहद कड़ा और तीखा प्रहार किया है। राठौड़ ने सीधे तौर पर गहलोत की उम्र पर तंज कसते हुए उन्हें राजनीति छोड़कर 'संन्यास आश्रम' में जाने की नसीहत दे डाली है।

मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मदन राठौड़ ने दो टूक शब्दों में कहा कि अशोक गहलोत का कार्यकाल अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उन्हें अब नई पीढ़ी के लिए रास्ता खाली कर देना चाहिए। राठौड़ ने चुटकी लेते हुए कहा, "गहलोत साहब अब 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं। हमारे यहां 75 के बाद संन्यास आश्रम शुरू हो जाता है। अब उन्हें 'इंतजार शास्त्र' छोड़कर 'संतोष शास्त्र' अपनाना चाहिए। आखिर कब तक आलाकमान के बुलावे के इंतजार में दुबले होते रहेंगे?"

'स्वभाव सनकी हो गया है, शब्द चयन बिगड़ा'

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने गहलोत के बयानों और मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उम्र का असर अब उनके फैसलों और शब्दों पर साफ दिखाई देने लगा है। राठौड़ ने सचिन पायलट का नाम लिए बिना गहलोत के पुराने बयानों ('नकारा-निकम्मा') की याद दिलाई और कहा, "उनका शब्द चयन बिगड़ने लगा है। कभी कहते हैं राजनीति और परिवार अलग है, और फिर खुद अपने बेटे को आगे ले आते हैं। जब इंसान का स्वभाव ऐसा हो जाए और विवेक शून्य होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि यह सब उम्र का असर है।"

इसके अलावा, राठौड़ ने कांग्रेस की मौजूदा हालत के लिए भी गहलोत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत ने जिन-जिन राज्यों (जैसे पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र) के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली, वहां उन्होंने पार्टी का बंटाधार ही किया। राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि विरोधी खेमे के नेताओं के दिल्ली में सक्रिय होने के कारण गहलोत भी वहां दौड़ लगा रहे हैं ताकि आलाकमान की नजरों में फिर से चर्चा में आ सकें, लेकिन अब उनका जलवा खत्म हो चुका है।

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