राजस्थान की राजनीति में भूचाल: मदन राठौड़ vs हनुमान बेनीवाल, काले झंडों से शुरू हुआ विवाद अब पहुंचेगा कोर्ट!
राजस्थान की राजनीति में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और आरएलपी (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल के बीच विवाद काफी गहरा गया है। कुचामन में भाजपा के एक कार्यक्रम के दौरान आरएलपी कार्यकर्ताओं द्वारा काले झंडे दिखाने से शुरू हुई यह तकरार अब व्यक्तिगत हमलों में बदल चुकी है।
जयपुर। राजस्थान की सियासत में गर्मागर्मी काफी बढ़ गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच शुरू हुई जुबानी जंग अब व्यक्तिगत स्तर पर पहुँच चुकी है। यह मामला कुचामन शहर से शुरू हुआ, जहां बीजेपी के कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन ने घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया।
कुचामन से शुरू हुआ विवाद
कुछ दिन पहले भाजपा का पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान चल रहा था। इसी कार्यक्रम के दौरान हनुमान बेनीवाल के कार्यकर्ता मदन राठौड़ के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने पानी, बिजली और सड़कों जैसी स्थानीय समस्याओं को लेकर आवाज उठाई और मदन राठौड़ को काले झंडे भी दिखाए।
RLP कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने उनके साथ सख्ती की और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। वहीं भाजपा पक्ष का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राठौड़ को धमकाने और घेरने की एक साजिश थी।
मदन राठौड़ का तीखा पलटवार
इस घटनाक्रम के बाद मदन राठौड़ ने हनुमान बेनीवाल पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2019 में भाजपा का आरएलपी के साथ जो गठबंधन हुआ, वो उनकी एक बहुत बड़ी भूल थी। राठौड़ ने बेनीवाल को 'विष का पौधा' तक कह दिया और कहा कि ऐसे लोगों को समाज में जगह ही नहीं मिलनी चाहिए। राठौड़ ने आरोप लगाए कि RLP कार्यकर्ताओं की मंशा उनके साथ मारपीट करने और उन्हें छती पहुँचाने की थी। उन्होंने बेनीवाल पर युवाओं को गुमराह करने तथा अराजकता फैलाने का भी आरोप लगाया।
बेनीवाल का पलटवार, "खाप पंचायत वाली सोच"
हनुमान बेनीवाल ने मदन राठौड़ के इन आपत्तिजनक बयानों को अस्वीकार किया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "मदन राठौड़" 'खुद को खाप' पंचायत का मुखिया समझ रहे हैं। वे फैसला सुना रहे हैं कि हनुमान बेनीवाल का बहिष्कार होना चाहिए। बेनीवाल ने यह स्पष्ट किया कि वे इस मामले में हाई कोर्ट के वकीलों से सलाह ले रहे हैं और जल्द ही मदन राठौड़ के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करवाएंगे। उन्होंने कहा, मैं लाठी-गोली से नहीं डरता, लोकतंत्र में विरोध का अधिकार हर किसी को है।
विवाद बढ़ने का कारण
देखा जाए तो दोनो नेताओं के बीच 2019 में गठबंधन टूटने के बाद से ही तनाव काफी बढ़ चुका है। कुचामन-डीडवाना के इलाको में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर RLP सक्रिय है। यह झड़प सिर्फ दो नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आरएलपी और बीजेपी के बीच भविष्य के गठबंधनों की संभावनाओं पर भी असर डाल रही है।
हनुमान बेनीवाल ले सकते हैं नया मोड़
हनुमान बेनीवाल मदन राठौड़ के लिए कानूनी रणनीति बना रहे हैं, जबकि मदन राठौड़ ने अपने बयान पर कोई पछतावा जताने से इनकार कर दिया है। मामला अब कोर्ट तक पहुंचने की संभावना है। अब देखना यह है कि क्या यह विवाद और आगे बढ़ेगा या दोनों पक्ष शांत होंगे। राजस्थान की जनता इस सियासी ड्रामे को करीब से देख रही है।
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