Rajasthan News: राजस्थान कृषि विभाग में बड़ी कार्रवाई: 3 अधिकारी सस्पेंड, उधर कांग्रेस ने किरोड़ी लाल मीणा को याद दिलाया 'इस्तीफे' का वादा
राजस्थान के कृषि विभाग में तीन अधिकारियों के निलंबन (Suspension) के बाद प्रदेश का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के तुरंत बाद कांग्रेस ने सूबे के कद्दावर नेता और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर सीधा हमला बोल दिया है।
जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार में एक ओर जहां प्रशासनिक सर्जरी और एक्शन का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। ताजा मामला सूबे के कृषि विभाग (Agriculture Department) से जुड़ा है, जहां काम में लापरवाही और गड़बड़ियों की शिकायत पर सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। लेकिन, इस कार्रवाई ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।
क्या है पूरा मामला और क्यों गिरे विकेट?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कृषि विभाग की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताओं और लापरवाही की गंभीर शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
विभागीय जांच और एक्शन: इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जब विभागीय स्तर पर जांच की गई, तो प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद गाज गिरी और तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।
जीरो टॉलरेंस का संदेश: सरकार इस कदम को भ्रष्टाचार और काम में कोताही बरतने वालों के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बता रही है।
कांग्रेस का किरोड़ी लाल मीणा पर सीधा अटैक
जैसे ही अधिकारियों के सस्पेंशन की खबर राजनीतिक गलियारों में पहुंची, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह से आक्रामक हो गई। कांग्रेस के निशाने पर सीधे सूबे के कृषि मंत्री और बीजेपी के फायरब्रांड नेता डॉ. किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) आ गए।
'पद छोड़ने' वाले वादे की दिलाई याद: कांग्रेस नेताओं ने मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को घेरते हुए उनका वह पुराना और चर्चित बयान याद दिलाया है।
क्या था वह वादा? दरअसल, किरोड़ी लाल मीणा ने मीडिया और सार्वजनिक मंचों से बेहद मुखर होकर यह दावा किया था कि यदि उनके विभाग में कोई भी भ्रष्टाचार साबित होता है या उनके रहते कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो वे एक मिनट की देरी किए बिना अपना मंत्री पद छोड़ देंगे।
सियासी गलियारों में उठ रहे सवाल
कांग्रेस अब इसी 'इस्तीफे' वाले बयान को हथियार बनाकर मंत्री किरोड़ी लाल से जवाब मांग रही है। विपक्ष का तीखा तर्क है कि:
अगर विभाग में सब कुछ सही चल रहा था और कोई भ्रष्टाचार नहीं था, तो फिर अचानक तीन अधिकारियों पर निलंबन की गाज क्यों गिरी?
और अगर अधिकारियों ने वाकई कोई बड़ा भ्रष्टाचार या गड़बड़ी की है, तो क्या किरोड़ी लाल मीणा अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और अपना पुराना वादा निभाते हुए पद से इस्तीफा देंगे?
फिलहाल, इस तीखे हमले पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा या सत्ता पक्ष की तरफ से कोई आधिकारिक पलटवार नहीं आया है। लेकिन, अधिकारियों के निलंबन से शुरू हुई इस सियासत ने राजस्थान के राजनीतिक माहौल में नई गर्माहट ला दी है।
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