Rajasthan News: 2 से ज्यादा बच्चे हैं तो भी लड़ सकेंगे चुनाव, राजस्थान में 32 साल पुराना कानून खत्म
राजस्थान सरकार ने पंचायत और निकाय चुनावों में दो संतान (Two-Child Norm) की अनिवार्यता वाले 32 साल पुराने कानून को समाप्त कर दिया है। सरकार की नई अधिसूचना के बाद अब 2 से अधिक बच्चे वाले व्यक्ति भी सरपंच, पार्षद और पंचायत का चुनाव लड़ सकेंगे। भैरोंसिंह शेखावत सरकार द्वारा बनाए गए इस नियम के हटने से 'प्रॉक्सी पॉलिटिक्स' खत्म होगी और जमीनी नेताओं को खुद चुनाव लड़ने का सीधा मौका मिलेगा।
जयपुर। राजस्थान के उन जमीनी नेताओं और आम लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है, जो पंचायत या नगर निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। राज्य सरकार ने 32 साल पुराने उस सख्त कानून को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है, जिसके तहत दो से ज्यादा संतान वाले लोग चुनाव नहीं लड़ सकते थे। यानी अब 2 से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार भी बेझिझक चुनावी मैदान में उतर सकेंगे।
राज्य सरकार ने इस नए कानून को तत्काल प्रभाव से लागू करते हुए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। आपको बता दें कि करीब तीन दशक पहले, राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के मकसद से यह पाबंदी लगाई थी। इस नियम के कारण पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और पार्षद पद के लिए बड़े परिवार वाले लोग अयोग्य माने जाते थे।
इस पुराने नियम का ग्रामीण इलाकों की राजनीति पर बहुत गहरा असर पड़ा था। कई कद्दावर नेता चुनाव नहीं लड़ पाते थे और मजबूरन अपने परिवार के किसी अन्य सदस्य (जैसे पत्नी या बेटे) को डमी कैंडिडेट के तौर पर उतारते थे। इससे कागजों में तो कोई और नेता होता था, लेकिन असली फैसले पुराने नेता ही लेते थे। अब इस रोक के हटने से परोक्ष राजनीति (Proxy Politics) पर लगाम लगेगी और जनता अपना असली प्रतिनिधि चुन सकेगी।
चुनाव के इस अहम नियम के अलावा, नगरपालिका अधिनियम में भी एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव किया गया है। अब कानून में कुष्ठ रोग (Leprosy) को लाइलाज बीमारी मानने वाला पुराना प्रावधान हटा दिया गया है। वहीं, दंगा या सांप्रदायिक तनाव वाले इलाकों में प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त पर सख्ती के लिए लाए गए "अशांत क्षेत्र विधेयक 2026" को अब अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इसके साथ ही जयपुर में महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय और अजमेर में योग विश्वविद्यालय से जुड़े नए कानून भी लागू हो गए हैं।
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