Rajasthan News: राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की बड़ी तैयारी: लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति उत्तराधिकार कानून में बदलाव के संकेत, जनता से मांगी जाएगी राय

उत्तराखंड के बाद अब राजस्थान में भी समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में कदम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। राज्य की भजनलाल सरकार UCC बिल के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की तैयारी में है।

Jul 6, 2026 - 17:29
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Rajasthan News: राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की बड़ी तैयारी: लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति उत्तराधिकार कानून में बदलाव के संकेत, जनता से मांगी जाएगी राय
CM Bhajanlal Sharma

जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) को धरातल पर उतारने के लिए विधायी और प्रशासनिक स्तर पर हलचल बेहद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार राज्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक समरूपता को मजबूत करने के लिए UCC बिल का एक व्यापक ड्राफ्ट तैयार कर रही है।

इस कानून के दायरे में शादी, तलाक और गोद लेने के नियमों के अलावा दो सबसे बड़े विषयों—लिव-इन रिलेशनशिप और पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार के अधिकार पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है।

इन दो बड़े कानूनों में फेरबदल की स्क्रिप्ट तैयार

सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान का UCC ड्राफ्ट काफी हद तक उत्तराखंड के मॉडल से प्रेरित हो सकता है, लेकिन इसमें प्रदेश की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं का भी ध्यान रखा जा रहा है:

लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त नियम: नए ड्राफ्ट के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पुलिस या निर्धारित अथॉरिटी के पास अनिवार्य रजिस्ट्रेशन (Compulsory Registration) कराने का प्रावधान शामिल किया जा सकता है। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई या जुर्माने की तैयारी है, जिसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा और अपराधों पर लगाम लगाना है।

उत्तराधिकार और संपत्ति कानून में समानता: पैतृक संपत्ति में बेटों और बेटियों को समान अधिकार देने के नियमों को और अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाएगा। सभी धर्मों और समुदायों के लिए संपत्ति हस्तांतरण और वसीयत के नियम एक समान करने की तैयारी है।

जनता की अदालत में जाएगा UCC का ड्राफ्ट

सरकार इस संवेदनशील और ऐतिहासिक बिल को बिना किसी विवाद के पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करना चाहती है। यही वजह है कि बिल को विधानसभा में पेश करने से पहले एक सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में रखा जाएगा।

पोर्टल के जरिए मांगे जाएंगे सुझाव: राज्य सरकार एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल या माध्यम शुरू करेगी, जहां राजस्थान का कोई भी नागरिक ड्राफ्ट को पढ़ सकेगा और उस पर अपने रचनात्मक सुझाव या आपत्तियां दर्ज करा सकेगा।

धार्मिक और सामाजिक संगठनों से वार्ता: कानून के जानकारों के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक गुरुओं, आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के साथ भी इस पर मैराथन बैठकें की जाएंगी, ताकि हर वर्ग की चिंताओं का समाधान किया जा सके।

आदिवासी अंचल को मिल सकती है छूट: राजस्थान में एक बड़ी आबादी जनजातीय (Tribal) समुदाय की है, जिनकी अपनी परंपराएं और रीति-रिवाज हैं। राजनीतिक गलियारों में कयास हैं कि केंद्र और राज्य सरकार आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं को अक्षुण्ण रखने के लिए उन्हें इस कानून के कुछ कड़े प्रावधानों से छूट दे सकती है।

उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा बड़ा राज्य बनने की होड़ में शामिल राजस्थान में UCC की इस सुगबुगाहट ने प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा दिया है। विपक्ष जहां इस कदम को ध्रुवीकरण की राजनीति बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे 'एक देश, एक कानून' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम मान रहा है। अब देखना यह है कि जनता से सुझाव लेने की यह प्रक्रिया कब से शुरू होती है।

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