Rajasthan News- स्कूल में टिफिन खोलते वक्त 9 साल की बच्ची को पड़ा दिल का दौरा, मौके पर ही मौत

राजस्थान के सीकर जिले में एक 9 साल की बच्ची की स्कूल में टिफिन खोलते वक्त अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। बच्ची 5वीं कक्षा की छात्रा थी और लंच ब्रेक के दौरान बेहोश होकर गिर पड़ी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि इतनी कम उम्र में दिल का दौरा आना गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

Jul 16, 2025 - 18:06
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Rajasthan News- स्कूल में टिफिन खोलते वक्त 9 साल की बच्ची को पड़ा दिल का दौरा, मौके पर ही मौत
Rajasthan Sikar School kid Heart Attack

सीकर, राजस्थान।

सीकर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक 9 साल की मासूम बच्ची की स्कूल में ही अचानक मौत हो गई। बच्ची स्कूल में टिफिन खोल ही रही थी कि अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। बाद में पता चला कि उसे दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा था। डॉक्टरों ने जांच के बाद मौत की पुष्टि की।

ये मामला सीकर के श्रीमाधोपुर के एक सरकारी स्कूल का है। बच्ची का नाम याशी था और वो कक्षा 5वीं में पढ़ती थी। रोज की तरह वो स्कूल गई थी, पढ़ाई की और फिर लंच ब्रेक में टिफिन निकालने लगी। तभी अचानक वो बेहोश हो गई। स्कूल स्टाफ और साथी बच्चे घबरा गए। तुरंत बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने कहा कि याशी को हार्ट अटैक आया था।

अब आप सोचिए, 9 साल की छोटी सी बच्ची और हार्ट अटैक? ऐसा सुनकर हर कोई हैरान है। आमतौर पर हम सोचते हैं कि दिल का दौरा तो बूढ़ों या अधेड़ों को ही आता है, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। बच्चों में भी ऐसे गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, जो चिंता की बात है।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। स्कूल में भी गम का माहौल है। याशी पढ़ाई में तेज थी और सभी टीचर्स की प्यारी थी। उसकी अचानक हुई मौत ने सबको झकझोर दिया है।

डॉक्टरों का कहना है कि अब बच्चों में भी दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। इसका एक कारण बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड, मोबाइल की लत और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी हो सकती है। इसलिए बच्चों की सेहत को लेकर अब और सतर्क रहने की जरूरत है।

अब सवाल उठता है – क्या हम बच्चों की सेहत को लेकर उतने जागरूक हैं जितना होना चाहिए?

याशी की ये घटना एक चेतावनी है, सिर्फ उसके परिवार के लिए नहीं, हम सबके लिए। बच्चों के खान-पान, खेलने-कूदने और सोने-जागने की आदतों पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो गया है। वरना ऐसी दुखद खबरें फिर से सुनने को मिल सकती हैं।

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