'मूर्खा धिराज' बोलने की सजा? 5 महीने पुराने मामले में हनुमान बेनीवाल पर FIR, सुरक्षा भी ली गई वापस
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर जयपुर पुलिस ने FIR दर्ज की है। आरोप है कि 5 महीने पहले बजरी माफिया के खिलाफ हुए एक आंदोलन में बेनीवाल ने सीएम भजनलाल शर्मा को 'मूर्खा धिराज' कहा था।
जयपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जयपुर पुलिस ने बेनीवाल और उनके 14 अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई पांच महीने पुराने एक आंदोलन से जुड़ी है।
पुलिस के अनुसार, 27 मई को भैराणा धाम में बजरी माफिया के खिलाफ आयोजित आंदोलन के दौरान हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनके मंत्रियों के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। आरोप है कि बेनीवाल ने मुख्यमंत्री को ‘मूर्खा धिराज’ कहकर संबोधित किया था। इस घटनाक्रम में एक और चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने जयपुर कमिश्नरेट से बेनीवाल को मिली सुरक्षा वापस ले ली और सुरक्षा हटाए जाने के अगले ही दिन यह एफआईआर दर्ज कर ली गई।
क्या हैं बेनीवाल पर मुख्य आरोप?
पुलिस ने हनुमान बेनीवाल और अन्य कार्यकर्ताओं पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उन पर लगे मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
धारा 144 का उल्लंघन करना।
प्रतिबंधों के बावजूद गैरकानूनी तरीके से भीड़ जुटाना।
भीड़ को भड़काना और जनता को जयपुर कूच के लिए उकसाना।
आरोप यह भी है कि आंदोलन के दौरान बेनीवाल अपने 150 गाड़ियों के काफिले के साथ बांदू कलां स्थित नेशनल हाईवे (NH-58) पर पहुंचे थे। मात्र 28 किलोमीटर की दूरी तय करने में उनके काफिले को चार घंटे लग गए, जिससे हाईवे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और आमजन को परेशानी हुई।
क्या थीं उस आंदोलन की मांगें?
पांच महीने पहले हुए इस प्रदर्शन में हनुमान बेनीवाल ने बजरी माफिया के खिलाफ मोर्चा खोला था। उनकी प्रमुख मांगें थीं:
माइनिंग विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।
बजरी लीज वाली जमीन का ड्रोन से सर्वे कराया जाए।
ई-रवाणा (e-Rawana) की ऑनलाइन चेकिंग सुनिश्चित की जाए।
ट्रैक्टरों से हो रही अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सियासी बवाल: RLP ने बताया 'राजनीतिक प्रतिशोध'
बेनीवाल पर हुई इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद आरएलपी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार दिया है। उनका आरोप है कि सरकार विपक्षी आवाजों और बजरी माफिया के खिलाफ उठने वाली बुलंद आवाजों को दबाने के लिए जानबूझकर ऐसे कदम उठा रही है।
पांच महीने बाद अचानक इस पुराने मामले की फाइल खुलने से राजस्थान की राजनीति का पारा चढ़ गया है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है या सरकार के खिलाफ बोलने वालों को सबक सिखाने की कोई कोशिश? फिलहाल, इस एफआईआर पर हनुमान बेनीवाल या आरएलपी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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