JLF: ‘मैंने बचपन में विभाजन की ट्रेजडी देखी है, सुनिए गीतकार गुलजार ने क्या बताया अपने दोस्त की मौत के बारे में

Jaipur Literature Festival: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में गीतकार गुलजार ने कहा कि आपकी जिंदगी का असर राइटिंग में रहता ही है, हर फनकार अपनी जिंदगी को अपने क्रिएशन में लगाता है। साथ ही अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि करीब 9-10 साल की उम्र में वो विभाजन की ट्रेजडी देखी है।

February 2, 2024 - 16:51
February 2, 2024 - 17:04
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JLF: ‘मैंने बचपन में विभाजन की ट्रेजडी देखी है, सुनिए  गीतकार गुलजार ने क्या बताया अपने दोस्त की मौत के बारे में
Jaipur Literature Festival: Gulzar

Jaipur News। जयपुर में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज दूसरा दिन है। 1 फरवरी को शुरू हुए इस फेस्टिवल की समाप्ति 5 फरवरी को होगी। साहित्य के इस उत्सव में देश-विदेश से 550 से अधिक लेखक, वक्ता आदि शामिल होंगे। बता दें कि फेस्टिवल का उद्घाटन राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने किया। वहीं गीतकार गुलजार ने यहाँ बीते कल अपनी किताब का विमोचन भी किया था।

वहीं, आज जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में गीतकार गुलजार ने कहा कि आपकी जिंदगी का असर राइटिंग में रहता ही है, हर फनकार अपनी जिंदगी को अपने क्रिएशन में लगाता है। साथ ही अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि करीब 9-10 साल की उम्र में वो विभाजन की ट्रेजडी देखी है। 9 साल की उम्र में मैं देश को नहीं समझ सकता था। बुजुर्गो से सुनता था, उससे लगता था की यह गलत हो रहा था है।

इसके अलावा गुलजार बंटवारे के दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि मैं उस दिन को नहीं भूल सकता जब मेरे दोस्त को मारा गया, दुकानें जला दी गईं। यह मेरे जहन से नहीं निकल सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मेरा पड़ोसी लगता है, मेरे कमरे की दूसरी खिड़की की तरह लगता है। मैं अपनी नज्मों को देखता हूं तो लगता है इनमें उदासी सी लगती है, उसमें मेरे बचपन का असर भी लगता है।

गुलजार ने आगे कहा- जितने भी रिफ्यूजी आए। उन्होंने दिल्ली में कुछ न कुछ काम शुरू कर दिया। कुछ किताब किराए पर देने लगे। मैं जासूसी नॉवेल लेकर आता था। रातोंरात किताब खत्म हो जाती थी। राज को जानने के लिए किताब खत्म हो जाती थी। सस्पेंस ही ऐसा होता था। दुकानदार भी परेशान हो गया। उसने मुझे रविंद्रनाथ टैगोर की बुक दी, यहां से मेरी जिंदगी बदल गई। नजरिया बदल गया।

वहीं, ‘गुलजार साहब’ बुक के राइटर यतींद्र मिश्र ने भी कुछ किस्से शेयर किए। उन्होंने बताया कि गुलजार साहब अपने दोस्तों के लिए उनकी गर्लफ्रेंड को लेटर लिखते थे। साथ ही अपने जीवन के अनुभव शेयर करते हुए गुलजार ने कहा कि आपकी जिंदगी में असर राइटिंग का रहता ही है। हर फनकार अपनी जिंदगी को अपने क्रिएशन में लगाता है।

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