अशोक गहलोत का फिर चला जादू, रिसर्च फेलोशिप फिर शुरू -रामस्वरूप ओला की पहल से पीएचडी स्कॉलर्स को बड़ी राहत
राजस्थान विश्वविद्यालय के शोध छात्रसंघ अध्यक्ष रामस्वरूप ओला के नेतृत्व में पीएचडी शोधार्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने 27 अगस्त 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर “रिसर्च फेलोशिप स्कीम फॉर पीएचडी स्टूडेंट्स 2023” बहाल करने की मांग रखी।
जयपुर। भाजपा सरकार द्वारा “रिसर्च फेलोशिप स्कीम फॉर पीएचडी स्टूडेंट्स 2023” को अघोषित रूप से बंद किए जाने के खिलाफ राजस्थान विश्वविद्यालय सहित प्रदेशभर के शोधार्थियों में गहरा आक्रोश था। इसी मुद्दे को मजबूती से उठाने के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय के शोध छात्रसंघ अध्यक्ष रामस्वरूप ओला के नेतृत्व में शोधार्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 27 अगस्त 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की और अपनी समस्याएं रखीं।
शोधार्थियों ने गहलोत को बताया कि कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई इस योजना के तहत NET/SET पास, लेकिन किसी अन्य फेलोशिप से वंचित पीएचडी स्कॉलर्स को तीन साल तक प्रति माह 20,000 रुपये की फेलोशिप मिलनी थी। कई स्कॉलर्स ने इसी भरोसे पर पीएचडी शुरू की थी, लेकिन वर्तमान सरकार द्वारा योजना रोक देने से उनके लिए शहर में रहकर रिसर्च जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया है और उनकी जमा‑पूंजी भी खत्म हो चुकी है।
आज राजस्थान विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयों के PhD रिसर्च स्कॉलर्स ने राजस्थान विश्वविद्यालय के शोध छात्रसंघ अध्यक्ष श्री रामस्वरूप ओला के नेतृत्व में मुलाकात कर "रिसर्च फेलोशिप स्कीम फॉर पीएचडी स्टूडेंट्स स्कीम 2023" के संबंध में चर्चा की।
हमारी कांग्रेस सरकार ने नेट,… pic.twitter.com/DO55AM35vp — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) August 27, 2025
रामस्वरूप ओला की अगुवाई में आए प्रतिनिधिमंडल की बात को गंभीरता से लेते हुए अशोक गहलोत ने न केवल इस जनकल्याणकारी योजना को दोबारा शुरू करने की सार्वजनिक मांग उठाई, बल्कि इसे पिछले दो वर्षों से निरंतर मानते हुए संशोधित रूप में लागू करने पर भी जोर दिया। गहलोत ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील करते हुए कहा कि ये रिसर्च स्कॉलर्स राज्य के लिए “असेट” हैं और उनकी फेलोशिप तुरंत जारी की जानी चाहिए, राशि भी बजट घोषणा के अनुरूप रखी जानी चाहिए।लगातार दबाव, छात्र नेतृत्व की सक्रियता और गहलोत के फॉलो‑अप का परिणाम यह हुआ कि सरकार ने संशोधित नोटिफिकेशन जारी कर “रिसर्च फेलोशिप स्कीम फॉर पीएचडी स्टूडेंट्स 2023” को फिर से लागू कर दिया। इससे सैकड़ों पीएचडी रिसर्च स्कॉलर्स को दोबारा आर्थिक सहारा मिला है और वे अपने शोध कार्य पर फोकस कर पा रहे हैं।
शोधार्थियों का मानना है कि यह पूरी लड़ाई इस बात की मिसाल है कि जब विश्वविद्यालय स्तर पर नेतृत्व मजबूत हो और राजनीतिक नेतृत्व संवेदनशील, तो बंद हो चुकी योजनाएं भी वापस आ सकती हैं। इस पूरे संघर्ष में रामस्वरूप ओला शोधार्थियों की आवाज़ बनकर उभरे हैं, जिन्होंने कैंपस की समस्या को सीधे सत्ता और नीति‑निर्माताओं तक पहुंचाया।
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