Rajasthan Politics: 'मैं CM था तब भी बेटे को आवास में नहीं रखा...', परिवारवाद के आरोपों पर अशोक गहलोत का करारा जवाब
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा द्वारा लगाए गए 'परिवारवाद' के आरोपों पर करारा पलटवार किया है। गहलोत ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्होंने अपने बेटे वैभव गहलोत को सीएम आवास में नहीं रखा, क्योंकि वे राजनीति और परिवार को हमेशा अलग रखने में विश्वास करते हैं।
जयपुर। राजस्थान की सियासत में 'परिवारवाद' (Nepotism) को लेकर छिड़ी बहस अब और भी तीखी हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा कांग्रेस और पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर परिवारवाद को लेकर कसे गए तंज के बाद, अब अशोक गहलोत ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आरोपों का करारा जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उन्होंने हमेशा राजनीति और परिवार को अलग-अलग रखा है।
हाल ही में मीडिया से बातचीत और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बड़ा बयान दिया। अपने बेटे वैभव गहलोत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "जब मैं राजस्थान का मुख्यमंत्री था, तब भी मैंने अपने बेटे को मुख्यमंत्री आवास (CM Residence) में नहीं रखा। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि राजनीति और परिवार दोनों को बिल्कुल अलग रखना चाहिए।" गहलोत ने कहा कि उन्होंने कभी भी अपने पद का इस्तेमाल परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं किया।
सीएम भजनलाल के आरोपों का सीधा काउंटर
दरअसल, अशोक गहलोत का यह बयान सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस हालिया हमले का जवाब माना जा रहा है, जिसमें सीएम शर्मा ने सोनिया गांधी और अशोक गहलोत पर तंज कसा था। भजनलाल शर्मा ने कहा था कि ये दोनों नेता बार-बार अपने बेटों को राजनीति में 'लॉन्च' करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता उन्हें हर बार नकार देती है।
गहलोत ने अपने बचाव में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सत्ता का दुरुपयोग किया गया हो। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी के पास जब कोई मुद्दा नहीं बचता, तो वे गांधी परिवार और कांग्रेस नेताओं पर 'परिवारवाद' का झूठा आरोप लगाने लगते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में लोकसभा और आगामी पंचायत/निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच, 'परिवारवाद बनाम विकास' का यह मुद्दा और भी ज्यादा तूल पकड़ने वाला है। गहलोत का यह बयान अपने बेटे वैभव गहलोत के राजनीतिक करियर को लेकर उठ रहे सवालों को शांत करने की एक सोची-समझी कोशिश है।
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