डोटासरा पहले अच्छे थे, अब बिगड़ गए”- कोचिंग नियंत्रण बिल पर भीतरघात से बौखलाए मदन राठौड़ का वार
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा कभी “अच्छे नेता” थे लेकिन अब “भाषा-शैली और कार्यशैली बिगड़ गई” है।
जयपुर | 4 सितंबर 2025
राजस्थान विधानसभा में कोचिंग नियंत्रण बिल पर मचे बवाल ने कांग्रेस-भाजपा के पारम्परिक टकराव को नई धार दे दी। बिल पर पार्टी लाइन से हटकर बयान देने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी राजेन्द्र पारीक को सार्वजनिक तौर पर नसीहत देने के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा खुद अपनी ही पार्टी में घिर गए; मौके को भाँपकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने तीखा प्रहार करते हुए कहा—“डोटासरा कभी अच्छे नेता थे, अब भाषा-शैली और कार्यशैली दोनों बिगड़ गई हैं… वे आसन से उलझते हैं, अविश्वास प्रस्ताव की हुंकार भरते हैं और फिर सदन से गायब रहते हैं, यह नेतृत्व-कमी दर्शाता है।”
डोटासरा-पारीक तकरार कैसे भड़की
कोचिंग संस्थानों पर नियमन वाले बिल पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पार्टी स्टैंड रखा, मगर पूर्व मंत्री राजेन्द्र पारीक ने विरोधाभासी टिप्पणियाँ कर दीं। डोटासरा ने तत्काल पारीक को टोका और बयान को पार्टी-लाइन के खिलाफ बताया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में डोटासरा ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने तक की बात कह दी, जिससे कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान सार्वजनिक हो गई।
भाजपा की रणनीति
राठौड़ ने डोटासरा पर “लोकतांत्रिक मर्यादा तोड़ने” का आरोप लगाते हुए पारीक को “अधिवक्ता-जैसा अनुभवी व सुलझा नेता” बताया और सलाह दी कि असहमति हो तो बंद कमरे में सुलझाएँ, मंच से अपमान न करें। भाजपा इसे कांग्रेस-विरोध नहीं, “लोकतंत्र बचाव” की नैतिक जिम्मेदारी बता रही है, ताकि विपक्षी खेमे की फूट को अधिकतम राजनीतिक लाभ में बदला जा सके।
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