रजलानी: गौरक्षक लोकदेवता बाबा छोड़सिंह महाराज के नवनिर्मित मंदिर की धूमधाम से हुई प्राण प्रतिष्ठा, संतों ने दिए प्रवचन
रजलानी गांव में गौरक्षक लोकदेवता बाबा छोड़सिंह महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और 7 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का भव्य समापन हुआ। इस दौरान संतों के सानिध्य में शिखर कलश, गौमाता और अश्वारोही प्रतिमा स्थापित की गई।
रजलानी। गांव में सिद्ध बाबा शिवनाथजी महाराज की जीवित समाधि स्थल (धूणे) की तलहटी में स्थित गौरक्षक लोकदेवता बाबा छोड़सिंहजी महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शुक्रवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। इस उपलक्ष्य में आयोजित सप्त-दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव की पूर्णाहुति एक भव्य शोभायात्रा के साथ हुई।
इस पावन अवसर पर बाबा छोड़सिंह के नवनिर्मित मंदिर में संतों के सानिध्य में शिखर कलश, गौमाता, सती माता व अश्वारोही प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई।
'कलयुग में भगवान की भक्ति ही मोक्ष का आधार'
रजलानी सरपंच पारस गुर्जर और युवा कार्यकर्ता सुनील पाड़ीवाल ने बताया कि श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के अंतिम दिन बड़ा रामद्वारा सूरसागर के कथाव्यास महंत परमहंस डॉ. रामप्रसाद महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा, "भक्त की सच्ची साधना से भगवान रीझ जाते हैं। कलयुग में जीवन के सभी पापों से मुक्ति का एकमात्र आधार प्रभु की भक्ति ही है। भगवान का नाम स्मरण करने मात्र से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।"
वहीं, आनंद भवन रामद्वारा गुलाबसागर (जोधपुर) के रामस्नेही संत श्रवणराम महाराज ने सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि श्रीमद भागवत और संतों के मुख से वाणी का श्रवण करने से जीव का उद्धार होता है। परोपकार और धर्म के कार्य कराने वाले हमेशा पुण्य के भागी होते हैं।
भजनों की सरिता और गगनभेदी जयकारों से गूंजा रजलानी
कार्यक्रम के दौरान शिवनाथ धूणां की साध्वी सुखिया बाई, कबीर आश्रम भोपालगढ़ के महंत मांगूदास साहेब और संत श्रवणराम महाराज सहित कई संतों ने भजनों की सरिता बहाई।
कथा महोत्सव और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे दिन शिवनाथ महाराज व छोड़सिंह महाराज के गगनभेदी जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा। इस भव्य आयोजन से रजलानी गांव का पूरा माहौल धर्ममयी हो गया। इस दौरान जिला परिषद सदस्य मांगीलाल पारासरिया, पुजारी सोहनराम प्रजापत, विशनसिंह डूडी सहित भारी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
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